व्यायाम के लाभ ब्रह्मचर्य के साधन पार्ट4

शौच, दंत धवन, और मुख आदि अंगों की शुद्धि के पश्चात और स्नान से पूर्व प्रतिदिन प्रत्येक व्यक्ति खासकर ब्रह्मचारी को नियमित शारीरिक व्यायाम करना चाहिए साधारण व्यक्ति चाहे स्त्री हो या पुरुष जो भी भोजन करता है उसे व्यायाम की उतनी ही आवश्यकता है जितनी भोजन की इसका कारण स्पष्ट है शरीर में व्यायाम रूपी अग्नि ना देने से भोजन ठीक नहीं पचता और वह शरीर का अंग ना बनकर उल्टा हानी ही करता है क्योंकि जिन खाद पदार्थों से रक्त आदि धातुओं का निर्माण हो कर बल और शक्ति का संचय होता है उनके ठीक ना पचने से भी रोग होने लगते हैं और शरीर में दुर्गंध उत्पन्न करके जहां अनेक रोगों की उत्पत्ति का कारण बनते हैं वहां मनुष्य के मन में अनेक प्रकार के दुष्ट विचारों को भी जन्म देते हैं जिससे मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो कर समरण शक्ति भी मंद हो जाती है और उसे अपने कर्तव्य कर्म का ज्ञान नहीं रहता परिणाम स्वरुप दुखदाई विषय भोगो में फस जाता है और यह विषय, वासना की अग्नि मनुष्य के स्वास्थ्य शक्ति सुंदरता स्फूर्ति और सद्गुणों को जलाकर भस्म साथ कर डालती है यहां तक कि मनुष्य की सबसे प्रिय वस्तु युवावस्था भी इसी की भेंट चढ़ जाती है दुखदाई बुढ़ापा आता है मनुष्य का शरीर निर्बलता और रोगों का घर बन जाता है जिससे लोक और परलोक दोनों ही बिगड़ जाते हैं ।

व्यायाम और स्वास्थ्य

व्यायाम किए बिना स्वस्थ रहना असंभव है। परमपिता परमात्मा ने हमें रोगी और दुखी होने के लिए नहीं बनाया हम तो दुखों और रोगों को स्वयं बुलाते हैं और पुनः रोते और पछताते हैं हमने स्वास्थ्य के मूलाधार exercise को जब से छोड़ा तभी से हमारी यह भयंकर दुर्गति हुई है जिसको लिखते हुए भी लज्जा आती है। आज क्या बालक क्या युवा सभी रोगी हैं क्योंकि हम ऋषियों की प्यारी शिक्षा ब्रह्मचर्य और इसके मुख्य साधन व्यायाम को छोड़ बैठे और उनके स्थान पर विषय भोग विलास और कामवासना के पीछे भागते हैं आज के युवक और युवतियां व्यायाम से प्रेम नहीं करते इन्हें अखाड़े और व्यायाम शाला में जाना रुचिकर नहीं इन्हें तो सिनेमा थिएटर और नाचघर प्यारे हैं नगरों में सिनेमा घरों के आगे भारी भीड़ लगी रहती है और अखाड़े खाली पड़े रहते हैं क्या हुआ एक आध सौभाग्यशाली व्यक्ति उधर मुंह करता है इतने पर भी स्वास्थ्य और बल की आशा करते हैं हमारे युवक अखाड़े में जाकर करें भी क्या कि इन्हें तो दंड बैठक और कुश्ती से इसलिए घृणा है कि कहीं इनके कोमल शरीर को अखाड़े की धूल मिट्टी ना लग जाए और इनके सुंदर वस्त्र व शरीर ही ना बिगड़ जाए ऐसे ही व्यायाम भीरु नपुंसकों से यह देश भरा पड़ा है।

भोले युवकों को इतना भी ज्ञान नहीं कि यदि एक मशीन को बरस भर ना चलाया जाए तो उसकी दशा कितनी बिगड़ जाती है उसे पुनः चालू करने के लिए नई मशीन के मूल्य से भी कहीं अधिक धन व्यय करना कर देना पड़ता है इसी प्रकार हमारा शरीर भी व्यायाम का कार्य ना करने से सर्वथा निर्बल, विकर्त और रोगों का घर बन जाता है उन्हें यतन करने पर भी ठीक होने को नहीं आता सब जानते हैं कि तालाब का पानी स्थिर होने से ही सकता है और नदी झरनों काजल चलने के कारण ही निर्मल और कांच के समान चमकता है इसी प्रकार exercise ना करने से भी रक्त का संचार भली-भांति नहीं होता इसलिए अनेक प्रकार के मल शरीर में रुकने वक्तृत्व होने से रक्त मलीन और गंदा होकर अनेक रोगों की उत्पत्ति का कारण बनता है व्यायाम से रक्त का संचार और शुद्धि होती है। सब अंगों में बल स्फूर्ति और शक्ति आती है व्यायाम लक्षा कुदरती सौंदर्य कांति और बल को उत्पन्न करता है सबरंग पतंगों को पूर्ण और पुष्ट करता है वास्तव में व्यायाम शरीर के लिए सबसे बढ़कर पुष्टि दायक और स्वास्थ्य पर है उचित व्यायाम से प्राय सभी रोग रुक जाते हैं आज तक संसार में कोई ऐसा मनुष्य नहीं हुआ जिसने बिना व्यायाम के परम आरोग्य और स्वास्थ्य की प्राप्ति की हो व्यायाम का भाव से ही लोगों का स्त्रोत है पूर्ण सुख और स्वास्थ्य की प्राप्ति का एकमात्र साधन exercise है।

व्यायाम के लाभ

जैसा कि पहले ही लिखा जा चुका है स्वास्थ्य प्राप्ति का मुख्य साधन व्यायाम ही है अब इसकी पुष्टि में रिसीव महरिशी ओं एवं अन्य अनुभवी व्यायाम आचार्यों का मत देते हैं परम वेद महरिशी धन्वंतरी का मत

महर्षि धन्वंतरी जी लिखते हैं exercise से शरीर बढ़ता है शरीर की कांति और सुंदरता बढ़ती है। शरीर के सब अंग सुडोल होते हैं पाचन शक्ति पढ़ती है आलस्य दूर भागता है शरीर दर्द और हल्का होकर स्फूर्ति आती है तथा तीनों दोषों की शुद्धि होती है थकावट दुख प्यासी पोषण ता नी गर्मी आदि सहने की शक्ति व्यायाम से ही आती है और परम आरोग्य अर्थात आदर्श स्वास्थ्य की प्राप्ति भी exercise से ही होती है।

चरक संहिता में इसी विषय में लिखते हैं

व्यायाम से शरीर में लघुता यानी की स्फूर्ति हल्का पन फुर्तीला पन कार्य करने की शक्ति स्थिरता क्लेश तथा दुखों का सहना दोषों जैसे वात पित्त कफ का नाश और जठराग्नि की वृद्धि होती है।

प्रोफेसर राम मूर्ति के जीवन की एक घटना

इस विषय में प्रोफेसर राम मूर्ति के जीवन की एक घटना दी जाती है और वह इस प्रकार है कि यूरोप में इन्हें नीचा दिखाने के लिए कुछ पापियों ने भोजन में धोखे से विष दे दिया जब इन्हें पता चला तो इन्होंने एक साथ 10 से 15000 दंड लगा डाली सर्विस पसीने के द्वारा बाहर निकल गया और वे बच गए।

व्यायाम करने वाले का शरीर अत्यंत शुद्ध व निर्मल और निर्दोष हो जाता है मन मित्रा दी थी कृति से निकल जाते हैं कभी मल बंधवाने के कब्ज नहीं होता उसे या चिंता नहीं करनी पड़ती की लैट्रिंग आएगी वह नहीं सोच दोनों समय खुलकर आता है आमा सेवा जठराग्नि को बल देने वाला सबसे सस्ता और सर्वोत्तम योग यानी नुस्खा व्यायाम ही है व्यायाम करने वाले को मंदाग्नी का रोग कभी नहीं होता।वह जो भी पेट में डाल लेता है वह सब कुछ शीघ्र ही पक्ष का शरीर का अंग बन जाता है उसका खाया पिया भी दूध आदि पोस्टिक भोजन उसके शरीर में ही लगता है लैट्रिंग में नहीं निकलता है उसकी बन सकती दिन प्रतिदिन बढ़ती ही चली जाती है उसके अनुप्रयोग की विधि यथा योग्य होती है शरीर के अंगों को सुडौल सघन गठीला और सुंदर बनाना व्यायाम का प्रथम कार्य है।यदि कोई मनुष्य केवल 1 वर्ष निरंतर नियम पूर्वक किसी भी exercise को कर ले तो उसका शरीर सुंदर और सुंदर बनने लगता है और जो सदैव श्रद्धापूर्वक दोनों से मैं यथा विधि व्यायाम करते हैं उनका तो कहना ही क्या उनके शरीर की सभी मांसपेशियां लोहे की भौतिक कड़ी और सुदृढ़ हो जाती है और सभी नस नाडिया संपूर्ण स्नायु मंडल और शरीर का प्रत्येक अंग व जल का खुलासा के समान कठोर और सुदूर हो जाता है चौड़ी छाती लंबी सुडौल और गधी भी भुजाएं सीवीपिंडिया चढ़ी हुई जंग आए विशाल मस्तक तथा चमचम आता हुआ रक्त वर्ण लाल मुख मंडल उसके शरीर की शोभा को बढ़ाता है यथा विधि exercise करने से शरीर का प्रत्येक अंक तेज वृद्धि को प्राप्त हो कर अत्यंत सुंदर और सघन बन जाता है शरीर पर चर्बी चढ़कर उसे हिला नहीं करने पाता पेट से लगा रहता है बढ़ने नहीं पाता।

ब्रह्मचर्य के साधन पार्ट 1 Free Pdf Download

ब्रह्मचर्य के साधन पार्ट 2 Free Pdf Download


ब्रह्मचर्य के साधन पार्ट 3 Free Pdf Download


इसीलिए सभी मनुष्यों को दीर्घायु और समस्त जीवन प्राप्त करने के लिए व्यायाम अवश्य ही करना चाहिए जो बयां नहीं करते वह शीघ्र ही बीमारी से मृत्यु को प्राप्त होते हैं और पूरी उम्र जीवन भर रोगी और दुखी ही रहते हैं।

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ब्रह्मचर्य के साधन पार्ट4


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1 thought on “व्यायाम के लाभ ब्रह्मचर्य के साधन पार्ट4”

  1. बहुत ही अद्भुत जानकारी है, आपका बहुत आभार ,लेकिन कुछ शब्दों में गलती है अगली बार से उस पर थोड़ा विशेष ध्यान दें, जैसे सारा विष को सर्विस किया हुआ है
    धन्यवाद।

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