ऊर्ध्वरेता प्राणायाम वीर्य को अपने वश में करना सीखिए

ऊर्ध्वरेता बनने की विधि से पूर्व वीर्य के विषय में कुछ जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। वीर्य प्राणी मात्र का जीवन तत्व है।इस वीर्य रूपी बीज के बिना संसार के किसी भी पदार्थ की उत्पत्ति रक्षा और जीवन नहीं रह सकता। इसको शास्त्रों में बीजतत्व, वीरतत्व, ओजस, बलतेज, शुक्र, पवित्रता, रेतस, कान्ति, बिंदु, आदि नामों से कहा है। ऊपर दिए गए सभी नाम मानव जीवन की दिव्य अलौकिक शक्तियों के सूचक हैं। यह दिव्य शक्ति हमारे भोजन का सारतत्व है। इस वीर्य की उधर्व एवं अध: नाम से दो गतियां होती है। दूषित आहार-विहार एवं संस्कारों से जहां वीर्य अधोगति को प्राप्त होता है वहां पर यतन विशेष करने से वीर्य की उधर्वगती भी हो जाती है। pranayam in hindi

ऊर्ध्वरेता प्राणायाम Urdhvareta pranayama kaise kare

ऊर्ध्वरेता होने के एक विशेष विद्या है। जिससे वीर्य की गति सदा के लिए उधरव हो जाती है। उसी विद्या की झलक व रूपरेखा आदर्श ब्रह्मचारी महर्षि दयानंद के ग्रंथों में मिलती है। अनेक वर्ष इसकी खोज तथा अनुभव स्वामी ओमानंद जी भी करते रहे इसका अनुभव उन्होंने अनेक ब्रह्मचारी प्रेमी साथियों ने किया और करवाया है। जिसने इसका अनुभव किया उसी ने इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। जो इसका दीर्घ काल तथा श्रद्धा पूर्वक और निरंतर सेवन करेगा वह निश्चय पूर्वक ऊर्ध्वरेता हो जाएगा। उसकी इच्छा के बिना वीर्य का एक बिंदु भी उसके शरीर से बाहर नहीं निकल सकता। उस विधि का कुछ बात ब्रह्मचर्य प्रेमियों के लाभ और नीचे दिया जाएगा।

यह एक pranayam प्राणायाम की विधि है इसके केवल पढ़ने मात्र से कार्य नहीं चलेगा। ब्रह्मचर्य के अन्य नियमों के पालन के साथ प्राणायाम का प्रतिदिन अभ्यास करना होगा।

ऊर्ध्वरेता प्राणायाम Urdhvareta pranayama kaise kare
Urdhvareta pranayama kaise kare

आजकल माता-पिता बालकों को उत्पन्न करने में ही अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ बैठते हैं ।ब्रह्मचर्य विहीन माता-पिता द्वारा उत्पन्न बालक दुर्बल रोगी एवं अल्पायु होते हैं।बीज में ही दोष होने के कारण पड़ा है बालकों की प्रवृत्ति संयम चरित्र ब्रह्मचर्य पालन की ओर ना होकर स्वभाव से विषय वासना की ओर होती है।तथा दुर्भाग्य से उन्हें चरित्र पूर्ण गुरुकुल का वातावरण उपलब्ध ना होकर शिक्षा के नाम पर सह शिक्षा की तीव्र भट्टी से गुजरना पड़ता है। जिसके परिणाम स्वरूप 15 16 वर्ष की आयु में पहुंचते-पहुंचते प्रत्येक बालक का शरीर कामाग्नि से जलने लगता है शरीर के अंदर जमा हुआ वीर्य पिघलने लगता है।जैसे शीत में जमा हुआ घी अग्नि पर रखने से पिंघल कर पतला हो जाता है तथा छेद युक्त पात्र से बाहर निकल जाता है इसी प्रकार छोटे छोटे बालकों में भी दुष्ट विचारों एवं कुचेष्टाओं के कारण वीर्य पतला होकर बहने लगता है और नाभि के नीचे मूत्राशय के समीप जो वीर्य का कोष (खजाना) है उस में भरने लगता है और वीर्य से वीर्यकोष भर जाता है यह वीर्य फिर लौटकर ऊपर नहीं जाता और स्वप्नदोष आदि के द्वारा बाहर निकल जाता है।

इसी प्रकार वीर्य का कोर्स बार-बार भरता और खाली होता रहता है।यह वीर्य जो शरीर का राजा है जिसे शरीर का अंग बनना था जो 25 वर्ष की आयु से पहले कभी भी व आयु भर शरीर से बाहर नहीं निकल सकता था तथा जो उध्रव गति को होकर शरीर और मस्तिष्क को शक्ति का रूप धारण करता आज इच्छा के विरूद्ध और शरीर का सार अमृत रूपी वीर्य मूत्र के समान पूरी तरह टपक टपक कर निकल रहा है ऐसी अवस्था में बालक और युवक खूब रोते और चिल्लाते है।

उनके आंसू पोछने के लिए यह ऊर्ध्वरेता होने का गुप्त रहस्य कर्तव्य भावना से स्वामी ओमानंद जी ने बताया था इससे शुक्राश्य ( वीर्य के खजाने ) में पड़ा हुआ वीर्य फिर ऊपर को जाने लगेगा जैसे दीपक का तेल जाता है। यह ऋषि यों की गुप्त विद्या है जो आज लाखों रुपए खर्च करने पर नहीं मिलती। ब्रह्मचर्य के दीवाने इस की रक्षा करने में रात दिन एक कर देते हैं भयंकर से भयंकर पर्वतों की गुफाओं और कंद्राओ को छान मारते हैं। तब जाकर इसका भेद मिलता है।इसलिए इसको पढ़कर व्यर्थ ना समझ लेना इसका श्रद्धा पूर्वक अभ्यास करो इससे सपन दोष आदि रोगों से अवश्य ही पिंड छूट जाएगा और वीर्य रक्षा में सफल हो जाओगे विधि इस प्रकार है।

पहले सिद्धासन से बैठ जाओ यह केवल मात्र इस सिद्धासन का ही अभ्यास किया जाए तो यह भी वीर्य रक्षार्थ तथा स्वप्नदोष को दूर करने में अत्यंत हितकर है। उसके पश्चात बाह्य कुंभक प्रणाम करें। यह प्रणाम कैसे किया जाता है नीचे वीडियो दी गई है वहां से आप सीख सकते हैं। ऊर्ध्वरेता बनने के लिए इस प्राणायम के आदि से अंत तक एक विशेष क्रिया का ध्यान रखना तथा अभ्यास करना है।

श्वास निकालने से पूर्व जो नाभि के नीचे मूलाधार को खींचा था उसे निरंतर खींचे ही रखना है ढीला नहीं छोड़ना जितने समय तक अथवा जितने भी प्राणायाम करें मूलाधार को खींचे ही रखना है। पहले पहले कुछ कठिनाई प्रतीत होगी किंतु कुछ दिनों के अभ्यास से सरलता से कर सकेंगे।फिर मूलाधार का खींचने से तथा गूदा खींची रहेगी और वीर्य को जहां ठहरता है वह भी ऊपर को खींचा रहेगा। मूलाधार खींचते समय नाभि के नीचे ध्यान करें कि हम वीर्य को ऊपर की ओर खींच रहे हैं कुछ समय के अभ्यास के बाद वीर्य ऊपर को यथार्थ में खींचने तथा जाने लगेगा और आगे चलकर आप पूर्णरूपेण ऊर्ध्वरेता बन जाएंगे। वीर्य ऊपर को देने लगेगा वीर्य को धीरे आना ही बंद हो जाएगा फिर आपकी इच्छा के बिना एक बिंदु भी बाहर नहीं निकल सकता। स्वपनदोष पर में आदि रोग तो हो ही कैसे सकते हैं।

ऐसी अवस्था भी आवेगी कि कभी स्वप्नदोष होने का अवसर आएगा तो अर्ध निंद्रा में आप मूलाधार को खींच लेंगे आंखें खुल जाएंगी स्वप्नदोष से बच जाएंगे। आपकी विजय होगी आप की विजय और हार आपके अभ्यास के ऊपर हैं 1 वर्ष तक इस प्राणायम का अभ्यास करें उसके पश्चात द्वितीय आभ्यंतर प्राणायाम करें और इसी क्रम से तीसरा और चोथा प्राणायाम भी करे। सभी प्राणायाम का अभ्यास करने पर आप निश्चित रूप से ऊर्ध्वरेता हो जाएंगे।

इस प्राणायाम की जितनी प्रशंसा की जाए थोड़ी सब ऋषि यों और विशेषता पूज्य पाद महर्षि दयानंद की कृपा है जो ऐसी विद्या इस गिरे हुए संसार को मिली है।इस प्राणायाम के प्रभाव से जहां स्वप्नदोष आदि रोग दूर होंगे वहां शरीर में वीर्य वृद्धि को प्राप्त होकर फिर बल पराक्रम और जितेंद्रयता की प्राप्ति होगी। इसका अभ्यास सब युवकों विद्यार्थियों तथा ब्रह्मचर्य प्रेमी स्त्री पुरुषों को करना। यह वीर्य रक्षा का सर्वोत्तम साधन और परम औषध है।इसके अतिरिक्त पद्मासन सिद्धासन सर्वांगासन उधर पद्मासन हलासन शीर्षासन योग मुद्रा आदि आसन तथा उज्जाई भस्त्रिका आदि प्राणायाम भी अति हितकारी होते हैं।यदि वीर्य विकार के कारण शरीर में जलन होती हो तो भस्त्रिका के स्थान पर शीतली प्राणायाम करना लाभदायक है।विचार शुद्ध पवित्र रखें लाल मिर्च गुड़ शक्कर प्याज लहसुन आदि उत्तेजक पदार्थों का सेवन ना करें प्राणायाम में विशेष सफलता पाने के इच्छुक नमक का सेवन भी छोड़ दें।

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7 thoughts on “ऊर्ध्वरेता प्राणायाम वीर्य को अपने वश में करना सीखिए”

  1. Amit ji apko yk baar Western toilet की demerit jaror batani chaiye sabko, क्योंकि ajj Bharat me jo indian toilet की जगह Western toilet ka use hote ja raha hai वो हम युवाओं को कई तरह की रोग से पीड़ित करते जाँ रहा हैl
    Apko yis par yk बार video jrur बनना चाहिए l

    Reply
    • Mai urdhvareta Pranayam ke ₹61 rupees ki payment ki lenki firbhi usaki document download nahi Ho Rahi fir bhi vaha by now ka option ata hai

      Reply
      • भाई आप मुझे मेल पर संपर्क करो वहां अपनी पूरी जानकारी भेज देना मुझे,

        Reply
    • भाई आप जलनेती किया करो मैने एक वीडियो बनाई हुई है जिसमें मैने जल नेती करना सिखाया है
      आप बहिय प्राणायाम भी किया करो

      आप ये वीडियो देखिए एक बार

      https://youtu.be/wFA7KyvkovE

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