जन्माष्टमी 2018 क्या श्री कृष्ण जी की 16000 रानियां थी?

Krishna – अक्सर आपने लोगों को यह कहते हुए सुना होगा विधर्मियों को यह कहते हुए सुना होगा कि श्री कृष्ण जी की 16000 रानियां थी यदि कोई व्यक्ति साधारण बुद्धि रखता है तो वह विचार कर सकता है क्या कोई व्यक्ति 16000 स्त्रियों से विवाह कर सकता है यह बात दुष्टों के द्वारा योगीराज श्री krishna जी का जो चरित्र है वह खराब करने के लिए यह बातें कही गई है। यह जितनी भी आप कहानियां सुनते है ना श्री krishna जी के बारे में यह सब की सब पुराणों से ली गई है। सत्य बात यह है कि इनका श्री कृष्ण जी के साथ में कोई भी लेना देना नहीं है।

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जन्माष्टमी 2018 पर योगीराज श्री कृष्ण जी पर असली जानकारी। असली कृष्ण कौन से पुराणों वाले या महाभारत वाले

सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि हम महाभारत की बात पर क्यों यकीन करें और पुराणों की बातों पर क्यों यकीन ना करें देखें दोस्तों महाभारत योगीराज श्री कृष्ण जी के समय में घटित हुई थी और महाभारत वेदव्यास जी ने लिखी थी जोकि कृष्ण जी के समकालीन थे और उन से अधिक कृष्ण जी के बारे में बाद वाले भला क्या जान सकते थे तो उन्होंने कहीं पर भी krishna जी को गलत नहीं लिखा है बल्कि महाभारत में तो उनको सबसे आदरणीय बताया गया है।

देखिए महाभारत में लिखा है

पांडवों द्वारा जब राजसूय यज्ञ किया गया तो श्री कृष्ण जी महाराज को यज्ञ का सर्वप्रथम अर्घ प्रदान करने के लिए सबसे ज्यादा उपर्युक्त समझा गया जबकि वहां पर अनेक ऋषि मुनि , साधू महात्मा आदि उपस्थित थे। वहीँ श्री कृष्ण जी महाराज की श्रेष्ठता देखिये उन्होंने सभी आगंतुक अतिथियो के धुल भरे पैर धोने का कार्य भार लिया। श्री कृष्ण जी महाराज को सबसे बड़ा कूटनितिज्ञ भी इसीलिए कहा जाता है क्यूंकि उन्होंने बिना हथियार उठाये न केवल दुष्ट कौरव सेना का नाश कर दिया बल्कि धर्म की राह पर चल रहे पांडवो को विजय भी दिलवाई। अब आप बताइये क्या भला कोई लम्पट, व्यभिचारी , ये सब कार्य कर सकता है?

कृष्ण जी महाराज की 16000 रानियों वाली बात क्या है ?

दुष्ट लोग हमेशा कहते हैं कि कृष्ण जी तो 16000 रानियां रखते थे वह व्यभिचारी थे।

अब इसका विरोध करने वाले क्या कहते हैं यह भी जान लीजिए
इस बात का विरोध करने वाले कहते हैं कि उस समय कोई दुष्ट था जो असम का राजा था और उसने 16000 रानियों को यानी कि 16000 राज्यों की स्त्रियों को रानियों को अपनी कैद में रखा था उनसे सम्भोग आदि करने के लिए। सत्य बात तो यह भी नहीं है।

सच तो दोस्तों यह है कि जो 16000 रानियों वाली कल्पना है यह पूरी की पूरी झूठ है ऐसा कभी कुछ हुआ ही नहीं था आप कल्पना कीजिए 16000 रानी है यानी कि 16000 राज्य पूरे भारत को अफगानिस्तान को इराक को सबको भी आप  मिला देंगे तब भी 16000 राज्य नहीं बनेंगे कोई एक 1 किलोमीटर के राज्य नहीं होते थे बहुत अधिक क्षेत्रफल के राज्य होते थे और यदि मान भी लिया जाए कि 16000 राज्यों को हराकर उनकी रानियों को कैद किया गया था तो उसमें भाई पांडव और कौरव की उनके घर की महिलाओं को कैसे छोड़ दिया उसने यह मात्र कोरी कल्पना है और कुछ भी नहीं है। यह बात पूरी की पूरी झूठ और मिलावटी है जो कि किसी भी प्रकार तरक की कसौटी पर खरी नहीं उतरती।

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1- बंकिम चंद्र चटर्जी जिन्होंने वंदे मातरम लिखा था उन्होंने 36 वर्षों तक महाभारत पर अनुसंधान किया था और श्री कृष्ण जी महाराज पर उत्तम ग्रंथ लिखे थे तो उन्होंने कहा है कि महाभारत के अनुसार श्री कृष्ण जी की केवल एक ही पत्नी थी जो कि रुकमणी थी और उनकी जो 16000 पत्नियां दो या तीन पत्नियां यह केवल कोरी कल्पना मात्र है और ऐसा सवाल ही पैदा नहीं होता कि उनकी 16000 पत्नियां थी।

2- हमारे देश में अभी एक ऋषि हुए थे जिनका नाम था ऋषि दयानंद वह अपनी सत्यार्थ प्रकाश में कृष्ण के बारे में क्या लिखते हैं चलिए जानते हैं। ऋषि दयानंद लिखते हैं पूरे महाभारत में कृष्ण जी के चरित्र में कोई दोष नहीं मिलता उन्हें वह श्रेष्ठ पुरुष कहते हैं ऋषि दयानंद श्री कृष्ण जी को महान विद्वान कुशल राजनीतिज्ञ सदाचारी और सर्वथा निष्कलंक मानते हैं।

यहां पर हमें एक बात जान लेनी चाहिए कि महाभारत में कृष्ण जी के बारे में कहीं पर भी कोई भी गलत बात नहीं लिखी गई है और ना ही किसी राधा का जिक्र आता है तो श्री krishna जी के साथ में रही हो तो कृष्ण को बदनाम किसने किया किसने झूठ लिखा उनके बारे में आइए हम आपको प्रमाण के साथ बताते हैं कृष्ण के बारे में झूठ किसने लिखा उन्हें कलंकित किया यह सब कार्य किया पाखंडियों के पुराणों ने उन पाखंडियों ने पुराणों को ऋषियों के नाम से लिखा था कि कोई उन पर शक ना कर सके।

ऐसे महान व्यक्तित्व पर चोर, लम्पट, रणछोर, व्यभिचारी, चरित्रहीन , कुब्जा से समागम करने वाला आदि कहना अन्याय नहीं तो और क्या है और इस सभी मिथ्या बातों का श्रेय पुराणों को जाता है।

चलिए अब कुछ पाखंडियो और पुराणों के विचार जानते है

इस्कॉन से तो आप सभी परिचित ही होंगे इस्कॉन के जो संस्थापक थे प्रभुपाद जी उनके अनुसार श्री कृष्ण को सही प्रकार से जानने के बाद आप वैलेंटाइन डे को जान पाएंगे यानी व्यभिचार करने वाला दिन को जान पाएंगे।

पुराणों में लिखा है श्रीकृष्ण के साथ गोपियों की रासलीला का झूठा मिथ्या वर्णन।

विष्णु पुराण अंश 5 अध्याय 13 श्लोक 59-60 में लिखा गया है
गोपियां अपने पति, पिता और भाइयों के रोकने पर भी नहीं रूकती थी रोज रात्री को भी व्यक्ति विषय भोग की इच्छा रखने वाली Krishna के साथ रमण भोग किया करती थी कृष्ण भी अपनी किशोर अवस्था सम्मान करते हुए रात्रि के समय उनके साथ रमण किया करते थे।

इससे आगे मैं किसी पुराण में लिखी हुई अश्लील बातें अपने इस लेख में नहीं लिखूंगा सिर्फ मैं आपको प्रमाण के लिए उन पुराणों के नाम ही बताऊंगा

योगीराज श्री कृष्ण जी को बदनाम इन पुराणों ने किया है।

विष्णु पुराण, भागवत पुराण, ब्रह्मा वैवर्त पुराण,

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Rishi Dayanand को एक वेश्या ने अपने जाल में फ़साना चाहा

Swami Dayanand प्रचार करते हुए मथुरा पहुंच गए वहां पर लोगों को वैदिक धर्म की शिक्षा देने लगे यह बात कुछ पण्डो को अच्छी नहीं लगी क्योंकि ऋषि दयानंद पाखंड का हमेशा विरोध किया करते थे और लोगों को वेदों के रास्ते पर चलने की शिक्षा दिया करते थे वह लोगों को सच्ची शिक्षा दिया करते थे जिस कारण से पाखंडी पंडो का धंधा मंदा पड़ गया था। Rishi Dayanand Swami Dayanand

Swami Dayanand Saraswati In Hindi

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पंडो ने एक चाल चाल चली उन्होंने सोचा क्यों ना ऋषि दयानंद को बदनाम कर दिया जाए तो उन्होंने एक वैश्या से संपर्क किया गुंडों ने वैश्या को बताया कि यहां पर एक दयानंद नाम का व्यक्ति आया हुआ है हमने उस को बदनाम करना है तुम कुछ ऐसा करो कि वह समाज की नजरों में बदनाम हो जाए तब उस वैश्या ने श्रृंगार किया और ऋषि दयानंद के पास पहुंच गई। Swami Dayanand

उस समय ऋषि दयानंद यमुना के तट पर संध्या कर रहे थे वह समाधि में थे तब वैश्या ऋषि दयानंद के सम्मुख आकर बैठ गई और जब ऋषि दयानंद की समाधि टूटी तो जैसे ऋषि दयानंद ने आंखें खोली तो वैसे ही उस महिला को देखते ही ऋषि दयानंद बोले माता तुम यहां क्यों आई। यह बात सुनकर वह वेश्या फूट-फूट कर रोने लगी और उसने सारी बात जो पंडों ने उससे कही थी किस प्रकार दयानंद को बदनाम करना है यह सब बातें उसने ऋषि दयानंद को बता दी और कहने लगी कि मैंने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई मुझे इतना सात्विक शब्द माता कहकर पुकारेगा।

तब वेश्या ने कहा कि आज से तो मेरा जीवन ही बदल गया और मैं आज से यह धंधा धंधा बंद कर दूंगी।

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तो देखा आपने एक योगी के संपर्क में आने से एक वैश्या का जीवन किस प्रकार बदल गया ऐसे होते हैं सच्चे योगी आज के जैसे पाखंडियों की तरह नहीं। इस छोटी सत्य घटना को यहां पर लिखने का मेरा उद्देश्य सिर्फ इतना ही है कि अधिक से अधिक लोग यह विचार करने में सक्षम हो सके जान सकें की सच्चे योगी कैसे होते हैं।

Manusmriti In Hindi

आख़िर में मैं आपको यही कहूंगा कि यम नियमो का पालन करते हुए गायत्री मंत्र या ओ३म का उच्चारण जरूर करें जिससे कि आप मोक्ष की तरफ आगे बढ़ सके क्योंकि मनुष्य का अंतिम लक्ष्य भी यही है हम इसीलिए बार-बार जन्म और मृत्यु में फंसे रहते हैं क्योंकि हम मोक्ष नहीं प्राप्त कर पाते हैं मोक्ष प्राप्त करेंगे तो हम इन सब दुखों से मुक्ति पा जाएंगे।

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Manusmriti कहा से खरीदे Manusmriti In Hindi

Manusmriti मनुस्मृति के बारे में आपने दूसरों से सुना होगा कि मनुस्मृति में यह लिखा है मनुस्मृति में वह लिखा है Manusmriti में मांस खाना लिखा है Manusmriti में जात पात लिखी है ना जाने कैसी-कैसी बातें आपने विधर्मियों के मुंह से मनुस्मृति के बारे में सुनी होगी।

Manusmriti

जर्मनी के महान दार्शनिक फ्रेडरिक नीत्शे ने एक बात कही थी उन्होंने कहा था कि मनुसमृति बाइबल से भी श्रेष्ठ ग्रंथ है, बल्कि मनुस्मृति की तुलना बाइबल से तो की ही नहीं जा सकती यदि कोई मनुस्मृति की तुलना बाइबल से करता है तो यह महापाप है।

Manusmriti सभी हिन्दुओ जरूर खरीदे

लेकिन अधिकतर हिंदुओं ने Manusmriti को पढ़ने का प्रयास तक नहीं किया होगा हिंदू जानते ही नहीं कि उनकी Manusmriti में क्या लिखा है बस वह तो विधर्मियों की बातें सुनते रहते हैं और उन्हें सही जवाब भी नहीं दे पाते हैं। इसीलिए आज हम आपको बताएंगे कि आप मनुस्मृति कहां से खरीद सकते हैं और विधर्मियों को उचित उत्तर दे सकते हैं विधर्मियों की बोलती बंद कर सकते हैं।

मनुस्मृति के बारे में जर्मनी के महान दार्शनिक फ्रेडरिक नीत्शे ने एक बात कही थी उन्होंने कहा था कि मनुसमृति बाइबल से भी श्रेष्ठ ग्रंथ है, बल्कि मनुस्मृति की तुलना बाइबल से तो की ही नहीं जा सकती यदि कोई मनुस्मृति की तुलना बाइबल से करता है तो यह महापाप है। आप जर्मनी के इन महान दार्शनिक के विचारों से समझ ही गए होंगे कि मनुस्मृति कितना अधिक महत्व रखती है मात्र कुछ दुष्टों के मिलावट कर देने से मनुस्मृति का महत्व खत्म नहीं हो जाता।

महर्षि मनु ही संसार में ऐसे पहले व्यक्ति हुए हैं जिन्होंने संसार को एक व्यवस्थित नियमबद्ध नैतिक और आदर्श मानवीय जीवन शैली की पद्धति सिखायी है। महर्षि मनु को मानव का आदि पुरुष भी कहा जाता है महर्षि मनु द्वारा रचित मनुस्मृति इतिहास का सबसे पुरातन धर्मशास्त्र है।

Manusmriti रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने मनु को एक प्रामाणिक धर्मशास्त्रज्ञ के रूप में कहा है

करोड़ों सालों तक मनुसमृति हमारा संविधान रहा है Manusmriti के आधार पर ही सारे निर्णय होते थे दुष्टों का दंड दिया जाता था और किसी के साथ भी कोई भेदभाव नहीं होता था मनुस्मृति में आप पाएंगे कि ऋण क्या होता है ऋण को चुकाने की पद्धति क्या है आखिरकार ब्याज दिया कितना जाए यह सब कुछ आपको मनुसमृति में मिल जाएगा।

आज कुछ नवबोध भीम वादी मनुस्मृति के बारे में दुष्प्रचार करते हैं ना जाने कैसी-कैसी बातें Manusmriti के बारे में बोलते हैं जो कि मनुस्मृति में है ही नहीं या फिर उसमें मिलावट कर दी गई है जब आप मनुसमृति को पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा कि सर्वप्रथम महर्षि मनु ने क्या कहा और बाद में उस बात के विपरीत मिलावट कर दी गई उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि सत्य क्या है और असत्य क्या है

दोस्तों जो दुष्ट बुद्धि के होते हैं तामसिक बुद्धि के होते हैं जो निरी निम्न कोटि की बुद्धि के होते हैं वह कभी भी सत्य को जानने का प्रयास नहीं करते वह सिर्फ और सिर्फ असत्य को जानकर ही भ्रांतियां फैलाते रहते हैं कभी यह जानने का प्रयास ही नहीं करते कि पहले तो ऋषि ने कुछ और कहा था बाद में जो उसके बाद के विपरीत बाते लिखी गई है वह बात ऋषि की कही हुई नहीं है वह तो दुष्ट और विधर्मियों की लिखी गई है तो भला विधर्मियों की बातों को सत्य मानकर कितना हाय तौबा मचाते हैं।

रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने मनु को एक प्रामाणिक धर्मशास्त्रज्ञ के रूप में कहा है और हिंदुओं में भगवान के रूप में पूज्य श्री राम अपने आचरण को शास्त्र सम्मत सिद्ध करने के लिए उस के समर्थन में मनु के श्लोकों को उध्दृत करते हैं।

मनुस्मृति कहां से खरीदें

जो पता मैं आपको मनुसमृति खरीदने के लिए दूंगा वहां से आपको 2 तरीके की मनुस्मृति मिलेंगी एक मनुस्मृति विशुद्ध मनुस्मृति है जिसके अंदर कोई मिलावट नहीं है उसमें से मिलावट को निकाल दिया गया है। और एक सिर्फ c है जिसके अंदर आपको मिलावटी श्लोक भी मिलेंगे और सही श्लोक भी मिलेंगे उसमें से आपको निर्णय करना होगा कि कौन सही है और कौन गलत है मैं आपको सलाह दूंगा कि आप यह दोनों ही मनुस्मृति मंगवा लीजिए

विशुद्ध मनुस्मृति

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मनुस्मृति

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मनुस्मृति मंगवाने का पता  – 427 , मंदिर वाली गली, नया बांस, खारी बावली, दिल्ली -110006
दूरभाष- 011-43781191 , 9650522778

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