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प्रोफेसर राममूर्ति की जीवनी कलयुग का भीम Part1

प्रोफेसर राममूर्ति नायडू जी को कलयुग का भीम भी कहा जाता है राममूर्ति नायडू जी में इतना अधिक बल था कि हाथी को भी अपनी छाती पर रोक लिया करते थे आज तक ऐसी ताकत का प्रदर्शन दुनिया में कोई नहीं कर पाया है क्योंकि प्रोफेसर राममूर्ति जी ब्रह्माचार्य का पालन करते थे और प्राणायाम में भी बहुत अधिक निपुण थे और व्यायाम बिल्कुल पुरानी पद्धति से करते थे जैसे कि हमारे ऋषि-मुनियों ने बताया है उन्होंने खोज निकाला था उस व्यायाम कि पद्धति को जिससे उनके अंदर इतना अधिक बल आगया था। indian hercules

दोस्तों यह लेख थोड़ा सा लंबा हो सकता है लेकिन यह लेख आप पूरा पढ़ना इसके बाद में आपको प्रोफेसर राममूर्ति नायडू जी के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल जाएगी और यदि आप व्यायाम करते हैं तो और भी अधिक जरूरी है आप इस लेख को पढ़ें।

आर्य समाज के विद्वान ब्रह्मचारी सन्यासी स्वामी ओमानंद जी ने जो कि खुद भी ब्रह्मचारी थे उन्होंने प्रोफेसर राममूर्ति जी के विषय में काफी महत्वपूर्ण लेख लिखा है प्रोफेसर राममूर्ति जी ने खुद जो अपने जीवन के बारे में लिखा था वहीं उन्होंने अपनी पुस्तक में बताया है।

प्रोफेसर राम मूर्ति का जन्म अप्रैल 1882 में हुआ था । राममूर्ति जी लिखते हैं 5 वर्ष की आयु में मुझे दमे के लक्षण दिखाई दिए पिताजी की आज्ञा से मैंने व्यायाम करना आरंभ कर दिया जिसके कारण मेरा रोग दूर हो गया मेरे सम्मुख भीमसेन हनुमान जैसे वीरों की मूर्तियां और चित्र सदैव रहते थे मैं निरंतर यही सोचा करता था कि इनके समान नहीं हो सकता तो अपने शरीर को बलवान तो अवश्य बना सकता हूं। 10 वर्ष की आयु में स्थानीय कालिजियेट स्कूल के अखाड़े में भर्ती हो गया। उन्हीं दिनों पहलवानों की कुश्ती की खबर सुनकर मेरे मन में भी उत्साह उत्पन्न हो गया मैं पहलवान बनने की इच्छा से व्यायाम करने लगा। जो जो रुचि बढ़ती गई त्यों त्यों व्यायामों का अपना अभ्यास बढ़ाता गया। मैंने बड़े उत्साह से सेंडो का डम्बल घुमाना शुरू किया। परंतु 2 वर्ष बाद ही उसे हताश होकर छोड़ दिया। इसका मुख्य कारण यह था कि उससे मुझे विशेष लाभ नहीं प्राप्त हुआ।

प्रारंभ की आयु में मैंने हारिजेंटलबार, पैरेललबार, रिंग आदि विदेशी ढंग की कसरते की। कुछ दिनों के पश्चात इन्हें भी छोड़ दिया और देसी व्यायाम करने लगा। जितने देसी प्रसिद्ध पहलवान मिलते गए उन सब से मैंने शारीरिक शक्ति बढ़ाने की भारतीय प्रथा और उपाय पूछे। परंतु कोई संतोष प्रद विधि ना बता सका। इस समय तक मैंने इंट्रेंस क्लास तक अंग्रेजी और थोड़ी संस्कृत पढ़ ली थी।

संस्कृत के पठन-पाठन में मुझे विशेष आनंद आया शारीरिक उन्नति के साथ-साथ अपने आर्य धर्म के शास्त्र मूल संस्कृत भाषा में पढ़ें। गीता के साथ-साथ सुश्रुत आदि आयुर्वेदिक ग्रंथ भी देखे। अपने शास्त्र के अध्ययन में मुझे शारीरिक उन्नति का सर्वोत्तम उपाय सुझाई पड़ा।अतः समस्त विदेशी ढंग छोड़ कर यही ग्रहण किया और घोषणा कर दी कि भीम, हनुमान, अर्जुन, आदि पूर्वजों के गौरव को बढ़ाने वाली यही सर्वश्रेष्ठ व्यायाम की प्रणाली है। इस देसी व्यायाम में सामान और औजार आवश्यक नहीं धन का कुछ भी व्य नहीं बस अभ्यास ही सब कुछ है जिससे शरीर के पुट्ठे मजबूत होते हैं पुठो की दृढ़ता के लिए प्राणायाम की आवश्यकता है मैं प्रतिदिन 3:00 से 6:00 बजे तक प्राणायाम करता था।12 मील बिना विश्राम पैदल चलता था इसके अतिरिक्त प्रतिदिन एक घंटा जल में तैरता था।

प्रोफेसर राममूर्ति नायडू

प्रोफेसर मूर्ति जी एक अन्य स्थान पर लिखते हैं-

आरंभ आरंभ में व्यायाम करने में शरीर अकड़ने लगता था बहुत बार में आधा व्यायाम करके छोड़ देता अखाड़े में आना दूभर ज्ञात पड़ता। किंतु तुरंत ही मेरे मन के देवता जाग पड़ते अपने आदर्शों को सिद्ध करने की मैंने प्रतिज्ञा कर ली थी यदि ऐसा ना कर सकूं तो मृत्यु अच्छी अंत में दुर्बलता पर मुझे विजय मिली धीरे-धीरे व्यायाम बढ़ने लगा उस समय मेरे व्यायाम का ऐसा करम था भोर ही उठकर घर से 3 कोस तक दौड़ता एक फौजी खड़ा था वहां जाकर खूब कुश्ती लड़ता था लड़कर फिर 3 कोस दौड़ता हुआ घर आता यहां अपने चेलों के साथ कुश्ती लड़ता उस समय अखाड़े में डेढ़ सौ जवान थे उनसे कुश्ती करने के पश्चात विश्राम कर मैं तैरने चला जाता।

फिर सांझ को 15 सौ से लेकर 3000 तक दंड और 5000 से लेकर 10000 तक बैठक कर लेता यही मेरा दैनिक व्यायाम था। इसका फल यह हुआ कि 16 वर्ष की आयु में मुझ में इतनी शक्ति हो गई कि नारियल के पेड़ पर जोर से धक्का मारता तो दो-तीन नारियल टूटकर भद भदा गिर पड़ते। इसी व्यायाम के कारण आज मेरी छाती 45 इंच चौड़ी है और फुलाने पर 57 इंच हो जाती है शरीर की लंबाई 5 फुट 6:30 इंच और तोल अढाई मन है।

प्रोफेसर राममूर्ति Rammurthy Naidu के बल के विषय में उस समय का एक लेखक लिखता है।

आज भारत के घर घर में राम मूर्ति का नाम फैला है वह कलयुगी भीम है हाथी को अपनी छाती पर चढ़ा लेते हैं। 25 घोड़ों की शक्ति की दो दो मोटर रोक लेते हैं छाती पर बड़ी सी चट्टान रखकर उस पर पत्थर को टुकड़े-टुकड़े करवा देते हैं आधे इंच मोटे लोहे की जंजीर कमल की डंडी के समान सहज में ही तोड़ देते हैं। 50 मनुष्यों से लदी हुई गाड़ी को शरीर पर से उतरवा देते हैं। यही नहीं 75 मील की तेजी से दौड़ती हुई हवा गाड़ी उनके शरीर पर से पार हो जाती है यह अलौकिक बल है देवी शक्ति है सुनकर आश्चर्य होता है देखकर दांतो तले उंगली दबाने पड़ती है किंतु यह सब बातें देखने में असाध्य प्रतीत होने पर भी असंभव नहीं है यदि प्रयत्न करें तो प्रत्येक मनुष्य राम मूर्ति के समान हो सकता है प्रयत्न भी हो और सच्ची लगन भी हो।

यह पहले ही लिखा जा चुका है कि राम मूर्ति बाल्य काल में श्वास रोग के रोगी थे वह अपनी देह की निर्बलता पर बड़े दुखी रहते थे भीम, लक्ष्मण, हनुमान आदि वीर योद्धाओं की कथा सुनकर उनके मन में सच्ची लगन उत्पन्न हुई। उन्होंने व्यायाम को अपने जीवन का अंग बनाया वे ब्रह्मचर्य के कट्टर समर्थक थे शारीरिक और मानसिक पवित्रता को ब्रह्मचर्य की नीव समझते थे। ब्रहाचार्य की धुन में ही उन्होंने 44 से 45 वर्ष की आयु तक विवाह नहीं किया भारत के बालकों और युवकों के लिए उन्होंने ब्रहाचार्य और प्राणायाम का क्रियात्मक प्रचार किया उनका स्वभाव बड़ा हंसमुख था वह हंसी को स्वास्थ्य के लिए बड़ा उपयोगी समझते थे।

प्रोफेसर राममूर्ति Rammurthy Naidu सदैव कहा करते थे-

मन से वचन से और तन से पवित्र रहो सादा भोजन करो जीवन सरल रखो प्रतिदिन व्यायाम करो यही संसार में सुखी रहने का मूल मंत्र है।

वह नव युवकों को सदैव इस प्रकार उत्साहित किया करते थे निष्फलता ! निष्फलता ! निष्फलता !!! क्या है? हमने नहीं जाना। एक बार दो बार तीन बार 5 बार 10 बार पर्यतन करते चलो सफलता अवश्य मिलेगी ‘’Do Or Die’’ करो या मरो करूंगा या मरूंगा यही हमारा मूल मंत्र है।

प्रोफेसर राममूर्ति भारत माता के होनहार बालकों की दुर्दशा देखकर उनके उद्धार के लिए व्याकुल होकर कहा करते थे-

भारत के बालकों और युवकों का उद्धार यही मेरे जीवन का मूल सूत्र है वह चाहे कृष्ण और लक्ष्मण भीम और भीष्म या हनुमान के समान हो या ना हो किंतु देश में युवकों की एक अजय सेना तैयार हो यह मेरी मनोकामना है। देश के कोने-कोने में घूमकर मैंने युवकों को प्रोत्साहन दिया है मन, वचन, तन और धन से भारत के नव युवको का मैं सेवक बना हूं 1 दिन में संसार से उठ जाऊंगा किंतु उसके पहले मैं यह आश्वासन चाहता हूं कि मेरी सेवा भारत माता के चरणों में स्वीकृत हुई है।

व्यायाम के विषय में फांसी के तख्ते पर हंसते-हंसते झूलने वाले ब्रह्मचारी रामप्रसाद जी लिखते हैं।

सब व्यायामों में दंड बैठक सर्वोत्तम है जहां जी चाहा व्यायाम कर लिया यदि हो सके तो प्रोफेसर राम मूर्ति की विधि से दंड तथा बैठक करें प्रोफेसर जी की रीति विद्यार्थियों के लिए बड़ी लाभदायक है थोड़े समय में ही पर्याप्त परिश्रम हो जाता है दंड बैठक के अतिरिक्त शीर्षासन और पद्मासन का भी अभ्यास करना चाहिए और अपने रहने के स्थान में वीरों महात्माओं के चित्र रखने चाहिए। Rammurthy Naidu

ब्रह्मचारी रामप्रसाद जी प्रोफेसर राममूर्ति की पद्धति से प्रतिदिन नियम पूर्वक व्यायाम करते थे इससे उनको कितना आश्चर्यजनक लाभ हुआ इस विषय में भी अपनी आत्मकथा में लिखते हैं

व्यायाम आदि करने के कारण मेरा शरीर बड़ा संगठित हो गया था और रंग निखर आया था मेरा स्वास्थ्य दर्शनीय हो गया सब लोग मेरे स्वास्थ्य को आश्चर्य की दृष्टि से देखा करते।

व्यायाम का महत्व

ब्रह्मचारी रामप्रसाद जी के विषय में एक स्थान पर लिखा है

उनमें असाधारण शारीरिक बल था तैरने आदि में वे पूरे पंडित थे थकान किसे कहते हैं वह जानते ही ना थे 60, 61 मील निरंतर चलकर वह आगे चलने का साहस रखते थे व्यायाम और प्राणायाम वह इतना करते थे कि देखने वाले आश्चर्यचकित होते थे।

प्रोफेसर राममूर्ति नायडू

आखिर में मैं आपको बताता हूं प्रोफेसर राममूर्ति जी की मृत्यु कैसे हुई देखिए प्रोफेसर राममूर्ति जी में बल बहुत अधिक था और वो देश भक्त भी थे उनको साधारण तरीके से मारना आसान नहीं था उनको कोई भी युद्ध में तो मार नहीं सकता था उन्हें छल से ही मारा जा सकता था और कोई कानूनी रूप से वह अपराधी भी नहीं थे कि कानून की सजा उन पर थोपी जाती इसलिए अंग्रेजों ने जब हाथी वाली चाल चली और कुछ ऐसा षड्यंत्र रचा की हाथी के द्वारा हाथी के पैरों से उनकी छाती को पूरी तरीके से कुचलवा दिया गया जिस तकते पर हाथी चढ़ा था वह तख्ता उनकी पसलियों के अंदर घुस गया इस प्रकार षड्यंत्र के द्वारा प्रोफेसर राम मूर्ति की अंग्रेजों ने हत्या कर दी थी। Rammurthy Naidu

अगले लेख में आप जानेंगे प्रोफेसर राममूर्ति ने किस प्रकार वह पद्धति खोज निकाली थी जिस पद्धति से हमारे देश के वीर योद्धा श्री राम कृष्ण भीम अर्जुन आदि महाबली व्यायाम करते थे वह प्राणायाम के साथ में व्यायाम करने की विधि अगले लेख में लिखी जाएगी। नमस्ते ओ३म


Brahmacharya ब्रहाचर्य ही अमृत है मिर्त्यु को जिताने वाला


Brahmacharya ब्रहाचर्य जीवन का सार तत्व है दूध में घी का जो स्थान है तिल में तेल का जो महत्व है गन्ने में रस का जो स्थान है शरीर में वीर्य का भी वही महत्व एवं स्थान है अतः जिस प्रकार एक जोहरी अपने मूल्यवान हीरो की रक्षा और देखभाल करता है उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को हीरे और मणियों से मूल्यवान अपने वीर्य की संभाल रक्षा करनी चाहिए।

चलिए आपको एक पुरानी सच्ची घटना बताता हूं बहुत से व्यक्ति सोचते हैं कि brahmacharya ब्रहाचर्य केवल भारत से ही संबंधित है और भारत से बाहर इसका कभी कोई वजूद नहीं रहा है । आप ने यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात के बारे में तो सुना ही होगा


Brahmacharya Benefits In Hindi


Brahmacharya Benefits

एक बार सुकरात के पास में एक व्यक्ति आया उसने पूछा स्त्री प्रसंग कितनी बार करना चाहिए ?

सुकरात ने उत्तर दिया जीवन में केवल एक बार और वह भी विषय भोग के लिए नहीं अपितु वंश चलाने के लिए।

उस व्यक्ति ने पुनः पूछा यदि इतना संयम ना हो सके तो क्या करना चाहिए सुकरात ने कहा यदि इतना नहीं हो सकता तो वर्ष में एक बार

उस व्यक्ति ने दोबारा पूछा यदि इससे भी तृप्ति ना हो तो?

सुकरात ने उत्तर दिया महीने में एक बार

उस व्यक्ति ने फिर पूछा यदि इससे भी संतुष्टि ना हो तो तो सुकरात ने कहा ऐसे विषय व्यक्ति को कफन अपने पास लाकर रख लेना चाहिए और कबर खुदवाकर तैयारी रखनी चाहिए फिर कितनी बार इच्छा हो उतनी बार विषय भोग कर सकता है।


Brahmacharya and success

योगेश्वर श्रीकृष्ण एक पत्नीव्रता थे उन्होंने 12 वर्ष तक कठोर Brahmacharya का पालन कर प्रद्युम्न नामक पुत्र को प्राप्त किया था जो रंग, रूप, बल, बुद्धि आदि गुणों में श्री कृष्ण के ही अनुरूप था ए श्री कृष्ण के उपासकों श्री कृष्ण के जीवन से शिक्षा लो और ऋतुकालगामी बनो।

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी विवाह के पश्चात 12 वर्ष तक राज महलों में रहे फिर 14 वर्ष तक सीता जी के साथ वनों में भ्रमण करते रहे दोनों ने पूर्ण ब्रहाचर्य का पालन किया।  राम की पूजा करने वालों श्री राम के गुणों को अपने जीवन में धारण करो ब्रह्मचर्य पालन करते हुए केवल ऋतुकाल में और वह भी केवल संतान प्राप्ति के लिए सहवास करो।

विवाह के पश्चात युवक समझते हैं कि हमें विषय भोग का पासपोर्ट मिल गया है अतः आरंभ में वे स्त्री सहवास में ही लिन रहते हैं इसी को सच्चा प्रेम और जीवन का उद्देश्य समझते हैं परंतु यह भयंकर भूल है ओ नवविवाहित दंपति सावधान अधिक संभोग अनुचित है इससे आपको सुख शांति और बल की प्राप्ति नहीं होगी। इसे सच्चा प्रेम समझना मूर्खता है इससे शरीर और आत्मा दोनों का पतन होता है इच्छा ना होने पर भी पत्नी के साथ सहवास करना हस्तमैथुन के समान घातक है बल्कि उससे भी भयंकर है। हस्तमैथुन के द्वारा तो मनुष्य अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारता है अपना ही नाश करता है लेकिन स्त्री व्यभिचार में पुरुष स्त्री को भी बर्बाद करता है।

Brahmacharya का नाश हस्थमैथुन के कुप्रभाव

हस्तमैथुन से इंद्रिय की दुर्बल निर्बलता हिस्ट्री की कमी सिर में दर्द कमर हाथ पैर और जोड़ों में दर्द आंखों के आगे अंधेरा छा जाना कवच बुद्धि नाशक सपन दोष और परमेश जैसी भयंकर व्याधियों उत्पन्न हो जाती है सिर के बाल समय में ही सफेद हो जाते और झड़ने लगते हैं शरीर पीला कांति ही रोगी और दुर्बल हो जाता है ऐसे लोगों की स्त्रियां भी वयभिचारिणी बन जाती है।

शरीर के ऊपर भी इसका भयंकर प्रभाव होता है बार-बार वीर्य निकलने से शरीर को भारी धक्का पहुंचता है हृदय कमजोर हो जाता है मनुष्य नपुंसक ओर भिरू बन जाता है लोगों के सामने जाने में वह भयभीत होता और शर्माता है।
Brahmacharya

व्यायाम ब्रह्मचर्य रक्षा के लिए व्यायाम अत्यंत आवश्यक है ब्रह्मचारी को प्रतिदिन नियम पूर्वक व्यायाम करना चाहिए व्यायाम वह संजीवनी है वह श्रेष्ठ रसायन है जिसके सेवन से दुर्बल व्यक्ति भी हष्ट पुष्ट बन जाते हैं रॉकी निरोगी अल्प आयु दीर्घायु और दुराचारी सदाचारी बनता है। निरंतर व्यायाम से इंद्रियां निर्विकार और शांत हो जाती है शरीर में नवयुवक और नव चेतना तथा स्फूर्ति का संचार होने लगता है व्याधियों दूर भागती है रोग सहसा आक्रमण नहीं करते अतः प्रत्येक ब्रह्मचारी को नित्य नियमित व्यायाम करना चाहिए।

राम प्रसाद बिस्मिल जी की जीवनी हिंदी की सर्वश्रेष्ठ आत्मकथा

एक सच्ची घटना 1 दिन एक युवक अपनी धर्म पत्नी के साथ एक वैध के पास आया अपनी धर्मपत्नी की परीक्षा कराई स्त्री को जुकाम और खांसी की शिकायत थी, मन्द मन्द जवर भी रहता था नवयुवक ने बताया कि उसकी पत्नी को यह बीमारी लगभग 3 वर्ष से है वैध जी ने पूछा आपका विवाह कब हुआ था युवक ने कहा 4 वर्ष पूर्व वैद्य जी ने कहा मेरा विचार है यह बीमारी भी उतना ही पुराना है स्त्री ने यह बात स्वीकार की वैद्य जी उस युवक को एक दूसरे कमरे में लाए और युवक से कहा इसकी बीमारी का कारण तुम हो तुम अधिक स्त्री सहवास करते हो और वह भी भोजन के ठीक पश्चात तुम्हारे अत्याचार का फल वह भोग रही है यह है अधिक सहवास का परिणाम।

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व्यायाम में दंड बैठक दौड़ तैरना आदि अपनी रूचि के अनुसार कोई भी चुन सकते हैं परंतु ब्रह्मचर्य रक्षा और स्वास्थ्य के लिए योगा आसनों को ही सर्व श्रेष्ठ एवं उपयोगी समझा जाता है।

योगासनों के द्वारा सिर दर्द खांसी जुखाम अपच अजीत दंत रोग नेत्र रोग आदि आजीवन नहीं होते सपन दोष दूर हो जाता है मुख्य मंडल पर लावण्य और आभा आ जाती है कार्य करने की शक्ति बढ़ जाती है आलस्य और सुस्ती पास नहीं पड़ती।

कुछ युवक कहते हैं क्या व्यायाम करें खाने को पोस्टिक पदार्थ तो मिलते ही नहीं ऐसा सोचना एक भूल है डॉक्टर ने महोदय का कथन है मनुष्य जितना खा लेता है उसका तिहाई सा भी नहीं बचा सकता शेष पेट में रहकर रक्त को विषैला बनाकर असंख्य विकार उत्पन्न करता है। व्यायाम करने पर हमारा भोजन हमारे सुंदर स्वास्थ्य का कानून बनेगा व्यायाम के द्वारा हम अपने भोजन को ठीक प्रकार बचाकर बीमारियों को दूर धकेल सकेंगे हम आपको पहलवानों की भांति 8-8 घंटे व्यायाम करने की सलाह नहीं देते। जो प्रतिदिन सहस्त्र दंड बैठक लगाते हैं उनके लिए पोस्टिक भोजन की आवश्यकता है परंतु जी से केवल आध घंटे व्यायाम हे करना है उसके लिए बादाम मलाई दूध और रबड़ी की आवश्यकता नहीं। व्यायाम के द्वारा मनुष्य का शरीर पुष्ट होता है उसके बुद्धि तेज यश और बल बढ़ते हैं अतः प्रत्येक व्यक्ति को बयान करना चाहिए।

इसलिए जो ब्रह्मचारी रहना चाहते हैं Brahmacharya ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहते हैं उन्हें व्यायाम रोज करना चाहिए और अधिक जानकारी के लिए आप नीचे व्यायाम का महत्व नामक पुस्तक है उसे डाउनलोड कर सकते हैं और ब्रह्मचर्य के ऊपर एक पुस्तक है उसे भी आप डाउनलोड कर सकते हैं और पढ़ सकते हैं।

ब्रहाचर्य गौरव पुस्तक यहा से डाउनलोड करें


व्यायाम का महत्व पुस्तक यहा से डाउनलोड करे

Night Fall Treatment In Hindi हस्थमैथुन स्वप्नदोष हमेशा के लिए ठीक करे

Night Fall Treatment In Hindi हस्थमैथुन स्वप्नदोष हमेशा के लिए ठीक करे, रामप्रसाद बिस्मिल जी का तरीका ब्रह्मचर्य के फायदे स्वप्नदोष की समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा श्री राम प्रसाद बिस्मिल जी की जीवनी से मैं आज आपको बताऊंगा कि आप कैसे ब्रह्मचर्य का पालन कर सकते हैं और आपको जो दूसरे तीसरे दिन स्वप्नदोष हो जाता है उससे हमेशा के लिए कैसे छुटकारा पा सकते हैं।


Night Fall Treatment In Hindi हस्थमैथुन स्वप्नदोष हमेशा के लिए ठीक करे, रामप्रसाद बिस्मिल जी का तरीका ब्रह्मचर्य के फायदे

आप में से जो भाई ब्रह्मचर्य पालन करना चाहते हैं उन्हें एक बार श्री राम प्रसाद बिस्मिल जी की जीवनी जरूर पढ़नी चाहिए आज मैं इस छोटे से लेख में क्रांतिकारी गुरु राम प्रसाद बिस्मिल जी की जीवनी से वही शब्द लिख लूंगा जो उन्होंने अपनी जीवनी में लिखे हैं कि कैसे उन्होंने ब्रह्मचर्य पालन किया। Night Fall Treatment In Hindi

राम प्रसाद बिस्मिल जी लिखते हैं व्यायाम आदि करने के कारण मेरा शरीर बड़ा शिव गठित हो गया था और रंग निखर आया था मैंने जानना चाहा कि संध्या क्या वस्तु है मुंशी जी ने आर्य समाज संबंधी कुछ उपदेश दिए इसके बाद मैंने सत्यार्थ प्रकाश पड़ा इससे तख्ता ही पलट गया सत्यार्थ प्रकाश के अध्ययन में मेरे जीवन के इतिहास में एक नवीन पृष्ठ खोल दिया। मैंने उस में उल्लेखित  के कठिन नियमों का पालन करना आरंभ कर दिया।

Night Fall Treatment

पहले आप को यह जान लेना चाहिए कि सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक है क्या दोस्तों सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक वह क्रांतिकारी किताब है जिसको अंग्रेजों ने खूब प्रयास किया था बैन लगाने का इस पुस्तक को पढ़ने के बाद में भारत के युवा क्रांतिकारी बन जाया करते थे और उस समय जो मिशनरियां भारत के युवाओं का धर्म परिवर्तन करवा रही थी वह सब ठप हो गया था इस पुस्तक को आप सभी अवश्य से भी अवश्य पढ़ना सत्यार्थ प्रकाश प्रत्येक क्रांतिकारी की प्रेरणा स्त्रोत पुस्तक रही है।

राम प्रसाद बिस्मिल जी आगे लिखते हैं मैं कंबल को एक तकत पर बिछा कर सोता और प्रातः काल 4:00 बजे से ही है शेया त्याग कर देता। सनान संध्या आदि से निर्मित होकर व्यायाम करता किंतु मन कि वृत्तीयां ठीक ना होती। मैंने रात्रि के समय भोजन करना त्याग दिया केवल थोड़ा सा दूध ही रात को पीने लगा सहसा ही बुरी आदतों को छोड़ दिया था इस कारण कभी-कभी स्वप्नदोष हो जाता। तब किसी सज्जन के कहने से मैंने नमक खाना भी छोड़ दिया केवल उबालकर साग या दाल से एक समय भोजन करता । मिर्च खटाई तो छूता भी ना था इस प्रकार 5 वर्ष तक बराबर नमक ना खाया नमक के ना खाने से शरीर के दोष दूर हो गए और मेरा स्वास्थ्य दर्शनीय हो गया सब लोग मेरे स्वास्थ्य को आश्चर्य की दृष्टि से देखा करते थे। Night Fall Treatment In Hindi

राम प्रसाद बिस्मिल जी की जीवनी हिंदी की सर्वश्रेष्ठ आत्मकथा

दोस्तों उम्मीद है कि आप श्री राम प्रसाद बिस्मिल जी के जीवन से लाभ उठाएंगे और उनके बताए गए रास्ते पर चलेंगे तो आप ब्रह्मचर्य पालन भी कर पाएंगे और अपने विकार भी दूर कर पाएंगे दोस्तों इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर कर देना WhatsApp Facebook पर ताकि ज्यादा से ज्यादा व्यक्तियों तक पोहोच सके और वह राम प्रसाद बिस्मिल जी के जीवन से लाभ उठा पाए और दोस्तों कमेंट करके जरूर बताना यह लेख आपको कैसा लगा।