Freedom Fighters In Hindi Essay रोहतक में बम का कारखाना

Freedom Fighters of India क्रांतिकारियों का रोहतक में बम का कारखाना क्रांतिकारियों की बलिदान गाथा

जिस समय क्रांतिकारी वीरों ने अंग्रेज सरकार की नाक में दम कर रखा था और चारों तरफ गिरफ्तारीओं की धूम थी और अंग्रेजो के शिकारी कुत्ते क्रांतिकारियों की खोज निकालने के लिए सूंघते फिरते थे तो भी क्रांतिकारी वीर अपना सिर हथेली पर रखें अपने उद्देश्य की सफलता के लिए यह शपथ लेकर कार्य में जुट जाते थे कि हम देश सेवा में अपना सब कुछ न्योछावर कर देंगे। तन मन धन हमारा सभी कुछ देश के अर्पण होगा और अपने घर का मोह त्याग कर सिर धड़ की बाजी लगा रहे थे उसी समय की एक छोटी सी घटना आपके सम्मुख रखता हूं। Freedom Fighters of India

Freedom Fighters of India

क्रांतिकारी वीरो का त्याग पराकाष्ठा पर था वह सर्व प्रयत्न से ही यह चाहते थे कि हमारा देश स्वतंत्र हो शांति की क्रांति से काम ना चलता देख कर ही उन्होंने अस्त्र-शस्त्र द्वारा क्रांति का रास्ता अपनाया था जगह-जगह इन वीरों ने बम बनाने के कारखाने बनाए। Freedom Fighters Of India

Freedom Fighters of India In Hindi Essay

क्रांतिकारी वीर भगवती प्रसाद ने दिल्ली में बम बनाने की अपेक्षा अन्य छोटे शहर में बम बनाना अधिक अच्छा समझा क्योंकि वहां से सरकार को शीघ्र पता ना चल सकेगा यह विचार कर आप अपने पुराने परिचित नवयुवक वैद्य लेख राम जी के पास गए जो कि रोहतक में रहते थे इस कार्य में सहयोग देने के लिए वैध जी ने सहर्ष स्वीकृति दे दी। भगवती प्रसाद को अधिक कार्य रहता था अतः उन्होंने यह कार्य वीर यशपाल को सौंप दिया दिल्ली से सब आवश्यक सामान लेकर जसपाल जी रोहतक में वैध लेख राम जी के पास पहुंच गए वैद्य जी ने पहले से ही एक छोटा सा मकान इस कार्य के लिए ले लिया था और सर्वत्र यह प्रसिद्ध करा दिया था कि अब हम पारे इत्यादि के योग से रस भसम इत्यादि कीमती दवाइयां बनाया करेंगे।

Freedom Fighters of India In Hindi

यहां आकर यशपाल बिल्कुल ग्रामीण व्यक्तियों की भांति ही रहने लगा और अपना नाम भी बदल लिया यशपाल ने अपना नाम किसना रख लिया। वैद्य जी की दुकान रोहतक के बीच बाजार में थी यशपाल प्रतिदिन प्रातः काल दुकान खोलता उसकी सफाई इत्यादि करता था और खाठ बिछाकर खरल लेकर दवाइयां घोटना प्रारंभ कर देता था और इमाम दस्ते में दवाइयां भी कूटता था। इस प्रकार कुछ दिन यही करम चलता रहा गर्मी का समय था वैद्य जी के पास सब काम करने वाला यही किसना ही था रोगियों की सेवा व आतिथ्य भी यही करता पंखा भी गर्मियों में प्राय यही चलाता था।

1857 Freedom Fighters In Hindi Language

इस प्रकार कार्य करते करते कुछ दिन बाद बम बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया बम बनाने के लिए एक तेजाब में शनै शनै दूसरी तेजाब मिलाते समय साथ साथ हीलाना भी पड़ता था। इसी प्रकार तीसरी तेजाब मिलानी पड़ती थी इनके मिलाते समय उनमें से पीले रंग का धुआं निकलता था बर्तन को छोड़ना भी हानिकारक था क्योंकि मिलाते समय चलाना आवश्यक था तेजाब के धुए ने यशपाल जी के तमाम वस्त्र ऐसे कर दिए कि जहां से पकड़ो वहीं से फट जाए। यह हाल हालत देख यशपाल लंगोट बांधने लगा और बाहर आने जाने के अन्य पुराने से वस्त्र रखने लगा कपड़ा ना पहने के कारण अब शरीर पर से तेजाब के प्रभाव से झुरी उतरने लगी परंतु कष्ट कोई विशेष नहीं होता था तेजाब के धुएं के कारण यशपाल को प्राय: खांसी, सिरदर्द, होता ही रहता था किंतु वह परवा ना करता था तेजाब के बर्तन आदि के साफ करने के कारण यशपाल के हाथ काटते थे और लाल लाल हो जाया करते थे रबर के दस्तानो का प्रयोग करने पर भी हाथों पर असर हो जाता था।

Rishi Dayanand को एक वेश्या ने अपने जाल में फ़साना चाहा

सुखदेव जी के बारे में यह बातें नहीं जानते होंगे आप

वह प्रतिदिन प्रातः बम बनाने के मसाले का एक घान पकाने के लिए चढ़ा देता था इसे पकाने में 4 घंटे लग जाते थे पुन्हा इसे ठंडा करने के लिए 4 घंटे रखना पड़ता था इस समय में यशपाल दुकान पर जाकर दवाई कूटता पंखा चलाता किसी के आ जाने पर कुए से ताजा पानी लाता था 1 दिन वैद्य जी के किसी मित्र ने इसके हाथों में लाली देखकर पूछा तेरे हाथ लाल क्यों है यशपाल ने बड़ी दिनता पूर्वक उत्तर दिया सरकार जरा मेहंदी लगा ली थी। Freedom Fighters of India

‘’तब लेख राम जी कहने लगे देखो साले जनखे को औरतों कि भांति मेहंदी लगाता है’’

Freedom Fighters In Hindi

यशपाल आगंतुकों के लिए पानी आर्य समाज के कुएं से लाता था वहां एक स्वामी जी रहते थे उनसे भी इसका संपर्क हो गया स्वामी जी भी कभी-कभी उससे जलादि मंगवाया करते थे इस प्रकार अनेक कष्ट सहता हुआ भी यह वीर कार्य में दृढ़ संकल्प लगा रहता था। freedom fighters in hindi essay

सांयकाल जब लेख राम जी घर जाते तो कुछ सामान कनस्तर ट्रंक या बोरी ब्यादि यशपाल के सिर पर रख कर ले जाया करते थे एक दिन इसी प्रकार वेध जी और यशपाल जा रहे थे तो रास्ते में वैध जी के एक मित्र मिल गए जो शोड़ा लेमन पी रहे थे। उसने वैद्य जी को भी एक शीशी देदी वैद्य जी ने यशपाल की और घुर कर पूछा क्यों बे किसना तू भी पिएगा सोडा? उसने उत्तर दिया पी लूंगा महाराज। freedom fighters in hindi essay

ऐ हैं? सोडा पिएगा ? बड़ा शौकीन है? साले कभी तेरे बाप ने भी पिया है सोडा? यह कहकर वैद्य जी ने 1 सीसी उसे दे दी वह सड़क पर ही कनस्तर रख कर खड़ा ही खड़ा सोडा पीने लगा तब वैध जी बोले देखो तो बैल की भांति खड़ा डकार रहा है बैठकर क्यों नहीं पीता तब उसे सड़क पर ही बैठ जाना पड़ा।

इतना ही नहीं उसको यदि कभी अखबार भी देखना होता तो छुपकर एकांत में पढ़ना पड़ता था क्योंकि रहस्य को छुपा कर रखना भी जरूरी था किसी को पता भी ना चले कि है पढ़ना भी जानता है इसलिए एकांत में पढ़ता था। एक बार वैद्य जी के एक मित्र ने इस अखबार पढ़ते देख लिया और कहा हरे कृष्णा तू पढ़ना भी जानता है? तब यशपाल ने कहा नहीं सरकार यूं ही मिथ्या किसी तस्वीर को दिखा कर मैं तो यह महात्मा गांधी की मूर्ति देख रहा था। वैध लेख राम यशपाल के खाने-पीने इत्यादि का विशेष प्रबंध करते रहते थे और उसे सब प्रकार की सुविधाएं देने का ध्यान रखते थे।

अंग्रेजो के द्वारा भारतीयों को ईसाई बनाने की आकांक्षा

बम बनाने का काम प्राय: समाप्त हो गया था। 1 दिन सांयकाल को शहर की पुलिस शहर में कुछ खोज कर रही थी तो लक्ष्मण दास जी ने जो उस समय कांग्रेस कमेटी के सेक्रेटरी थे वेद लेखराज जी को बताया कि पुलिस शहर में घूम रही है यह सुन कर वह जीता था यशपाल जी घबराए सोचा कहीं हमारा तो पता पुलिस को नहीं लग गया उसी रात को ग्रामीण भेष धारण करके यह दोनों उस मसाले को गठरी बांध कर दिल्ली चले गए। Freedom Fighters of India

Freedom Fighters of India

इस प्रकार रोहतक में भी इन क्रांतिकारी वीरों ने बम बनाने का स्थान बनाया और बम बनाए इन्हीं बमों का प्रयोग इन वीरों ने वायसराय को मारने के लिए उसकी स्पेशल रेल के नीचे दबाकर भी किया था। Freedom Fighters of India

देश की स्वतंत्रता के लिए इन वीरों ने कितने कष्ट सहे इसकी हम कल्पना भी नहीं कर पाते उन्हें आजादी के प्रधानों के अमर बलिदान का फल है जो आज हम स्वतंत्रता के आनंद में फूले नहीं समाते और सब राज्य का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उन्हीं वीरों ने इस स्वराज्य रूपी वृक्ष को अपने रक्त रूपी जल से सीच कर बड़ा किया था इतिहास में उन वीरों का नाम सदा के लिए अमर रहेगा। Freedom Fighters of India

मूल लेखक – स्वामी ओमानंद जी

 इस विषय पर आप हमारी वीडियो भी देख सकते है

 

Freedom Fighters of India,freedom fighters in hindi essay,freedom fighters names in hindi,Freedom Fighters of India,Freedom Fighters of India,essay on indian freedom fighters in hindi,freedom fighters name in hindi,freedom fighters of india in hindi language wikipedia,essay on freedom fighters in hindi language,1857 freedom fighters in hindi language,10 freedom fighters of india in hindi language

Sukhdev सुखदेव जी के बारे में यह बातें नहीं जानते होंगे आप

सरदार भगत सिंह के साथ फांसी पर लटकाए जाने वाले अनंतम साथी श्री Sukhdev Thapar सुखदेव लायलपुर पंजाब के रहने वाले थे। श्री Sukhdev जी का जन्म 15 मई 1907 को दिन के 10:45 बजे हुआ था। आपके पिता का देहांत आपके जन्म से 3 वर्ष पहले हो चुका था इसलिए आप की सेवा और शिक्षा का प्रबंध आपके चाचा अचिंत राम ने किया था।

सुखदेव की माताजी जब जब कहती थी कि सुखदेव मैं तुम्हारी शादी करूंगी तो घोड़ी पर चढ़ेगा तब सुखदेव सदा यही उत्तर देते थे घोड़ी पर चढ़ने के बदले फांसी पर चढ़ूंगा।

Sukhdev Thapar In Hindi

जब Sukhdev की 5 वर्ष की आयु थी तो उनको धनपतमल आर्य हाई स्कूल में दाखिला दिलवाया गया। स्कूल में सुखदेव ने सातवीं श्रेणी तक शिक्षा प्राप्त की। इसके पश्चात लायलपुर सनातन धर्म स्कूल में भेजे गए और सन 1922 में इस स्कूल से आप ने द्वितीय श्रेणी में 10 की परीक्षा पास की। सुखदेव की बुद्धि बहुत ही तीव्र थी। Sukhdev किसी भी परीक्षा में अनुत्तीर्ण नहीं हुए। उनका स्वभाव शांत और कोमल था सुखदेव की बुद्धि तर्क करने में बहुत चलती थी। सुखदेव का जन्म आर्य समाजी घर में होने के कारण उन पर आर्य समाज का विशेष प्रभाव पड़ा। जहां भी आर्य समाज का सत्संग होता था वहां पर आप अवश्य जाते थे और आप को हवन संध्या योगाभ्यास का भी शौक था।

sukhdev thapar in hindi
सन 1919 में पंजाब के अनेक शहरों में मार्शल लॉ जारी था उस समय आप की आयु 12 वर्ष की थी और सातवीं श्रेणी में पढ़ते थे। आपके चाचा इसी मार्शल ला में गिरफ्तार कर लिए गए बालक Sukhdev पर इस घटना का विशेष प्रभाव पड़ा सुखदेव के चाचा अचिंत राम का कहना था कि जब मैं जेल में था तब सुखदेव मुझसे मिलने आता था। तब पूछता था कि चाचा जी क्या इस जेल में आपको कष्ट दिया जाता है और कहता था कि मैं तो किसी को भी नमस्ते तक नहीं करूंगा।

उसी समय एक दिन सारे शहर की पाठ शालाओं के विद्यार्थियों को एकत्रित करके यूनियन जैक ब्रिटिश झंडे का अभिवादन कराया गया था परंतु सुखदेव इसमें सम्मिलित नहीं हुए और चाचा के जेल से आते ही बड़े गर्व से कहा कि मैं झंडे का अभिवादन करने नहीं गया।

सन 1921 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया तो सारे भारत में जागृति की लहर फैल गई सुखदेव के जीवन में एक बार बड़ा भारी परिवर्तन हुआ आपके ऊंचे विचार होते हुए भी आपको कीमती कपड़े बहुत अच्छे लगते थे परंतु आंदोलन प्रारंभ होते ही आपने विलायती ढंग के कपड़ों का सदा के लिए परित्याग कर दिया और खद्दर के कपड़े पहनने लगे इसके साथ हिंदी भाषा पढ़नी प्रारंभ कर दी और अपने साथियों में भी हिंदी भाषा का प्रचार करते थे आप का कहना था कि देश के उत्थान के लिए राष्ट्र भाषा की आवश्यकता है और उसकी पूर्ति हिंदी भाषा ही कर सकती है।

इस असहयोग आंदोलन ने सुखदेव के जीवन को बदल डालो उधर माता विवाह करना चाहती थी परंतु चाचा जी विरुद्ध क्योंकि वे आर्य थे अतः आर्य सिद्धांत के अनुसार विवाह करना चाहते थे सुखदेव की माताजी जब जब कहती थी कि सुखदेव मैं तुम्हारी शादी करूंगी तो घोड़ी पर चढ़ेगा तब सुखदेव सदा यही उत्तर देते थे घोड़ी पर चढ़ने के बदले फांसी पर चढ़ूंगा। ऐसा ही हुआ सुखदेव ने देश को आजाद करवाने के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया और भगत सिंह, राजगुरु सुखदेव, को अंग्रेजों ने देश को आजाद करवाने के अपराध में फांसी पर चढ़ा दिया।

Essay On Sukhdev

सन 1922 में जब सुखदेव ने एंट्रेंस की परीक्षा पास कर ली तब आपके चाचा ने जेल से आगे की उच्च शिक्षा पाने के लिए लाहौर डीएवी कॉलेज में प्रवेश हो जाना को काहा परंतु सुखदेव ने चाचा की आज्ञा का पालन ना करके नेशनल कॉलेज में नाम लिखवा लिया यहां पर ही आपका परिचय सरदार भगत सिंह आदि से हुआ था आप की मंडली में 5 सदस्य थे और परस्पर बहुत प्रेम था विद्यालय के छात्र आपको पंच पांडव के नाम से पुकारते थे।

श्री सुखदेव और सहपाठियों को पर्वत यात्रा का बहुत ही शौक था सन 1920 के ग्रीष्मकालीन अवकाश में कांगड़ा की पहाड़ियों पर भ्रमण करने गए इस यात्रा में यशपाल भी सम्मिलित था वापस आने के समय इस पार्टी को दिनभर में 42 मील की यात्रा करनी पड़ी।

अंग्रेजो के द्वारा भारतीयों को ईसाई बनाने की आकांक्षा

Rishi Dayanand को एक वेश्या ने अपने जाल में फ़साना चाहा

sukhdev bhagat singh rajguru
साइमन कमीशन के आने पर इन पंच पांडवों ने निश्चय किया कि समारोह पूर्वक प्रदर्शन करना चाहिए समारोह के लिए झंडिया बना रहे थे इस समय केदारनाथ भी थे परंतु उन्हें नींद आ गई तो वे सो गए उधर सुखदेव जी सरदार भगत सिंह के घर सो रहे थे भगत सिंह ने भी कहा कि मैं भी सोता हूं परंतु मित्रों ने ना सोने दिया उसी समय भगत सिंह के अंदर विचार आया कि यदि पुलिस हमारे घर पर घेरा डालेगी तो सुखदेव पकड़ा जाएगा इसलिए सुखदेव को सावधान करने के लिए एक मित्र को भेजा उसने थोड़े से समय में आकर कहा कि भगत सिंह के घर पर पुलिस पहुंच गई है।

Sukhdev Bhagat Singh Rajguru

पुलिस ने श्री Sukhdev को पकड़ लिया और बहुत प्रसन्न किए परंतु उन्होंने किसी प्रश्न का भी उत्तर नहीं दिया आपको 12 घंटे जेल में रखा गया इसके पश्चात कुछ लोगों ने जाकर आपको छुड़वा दिया उसके पश्चात कुछ लोगों में पार्टी बनाने का विचार हुआ तो भगत सिंह और सुखदेव नया प्रस्ताव रखा कि नव युवकों को राजनीतिक शिक्षा देनी चाहिए सरदार भगत सिंह ने प्रचार का कार्य प्रारंभ किया इन के पश्चात श्री सुखदेव को सौंपा गया आप इस प्रचार कार्य को बहुत दिनों तक बड़ी सफलता के साथ करते रहे आप का सिद्धांत था कि मैं केवल कार्य करना चाहता हूं प्रशंसा नहीं।

इसके पश्चात 15 अप्रैल सन 1929 को श्री किशोरी लाल और प्रेम नाथ के साथ आप की भी गिरफ्तारी हो गई। अंत में 7 अक्टूबर सन 1930 को फांसी का दंड सुनाया और 13 मार्च सन 1931 को 24 वर्ष की आयु में आप को फांसी पर लटका दिया गया आप अपना नाम अमर कर गए और बलिदान इयों में लिखवा गए।

दोस्तों देश तो आजाद हो गया लेकिन यह देश आज भी मानसिक रूप से गुलाम है यहां का युवा आज भी विदेशियों को ही सब कुछ समझता है वह भूल गया है कि कभी युवाओं ने ही बलिदान देकर इस देश को आजाद करवाया था और अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था सिर्फ इसलिए आने वाली नस्लें शायद उनके बलिदान से कुछ सीखें और इस देश के लिए कुछ करें लेकिन अफसोस होता है आज के युवाओं को देख कर जो कि नशे में डूबते जा रहे हैं अश्लील चीजों में डूबते जा रहे हैं भोग विलास अपना अमूल्य समय बर्बाद कर रहे हैं।

मैं इस लेख के माध्यम से युवाओं से सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि अपने अंदर देशभक्ति की भावना को कूट-कूट कर लीजिए सबसे पहले आपके लिए आपका देस है इस देश को बचाइए आज भी यहां के नेता इसे लूट रहे हैं। इंकलाब जिंदाबाद, वंदे मातरम, भारत माता की जय, जय जननी जय जन्मभूमि।

sukhdev rajguru,sukhdev thapar caste,essay on sukhdev,sukhdev thapar quotes,sukhdev wikipedia,sukhdev siblings,sukhdev thapar in hindi,sukhdev bhagat singh rajguru,

अंग्रेजो के द्वारा भारतीयों को ईसाई बनाने की आकांक्षा

1847 से बहुत पहले से ही अनेक कूटनीतिज्ञ अंग्रेजों ने भारत को ईसाई बनाने में ही अपने राज्य की  स्थिरता समझी थी। ईस्ट इंडिया कंपनी के अध्यक्ष मिस्टर मेडल्स ने 1847 में पार्लियामेंट में कहा था। 

‘’ परमात्मा ने हिंदुस्तान का विशाल साम्राज्य इंग्लैंड को सौंपा है इसलिए ताकि हिंदुस्तान के एक सिरे से दूसरे सिरे तक ईसा मसीह का विजय झंडा फहराने लगे हम में से प्रत्येक को अपनी पूरी शक्ति इस कार्य में लगा देनी चाहिए जिससे समस्त हिंदुस्तान को ईसाई बनाने के महान कार्य में देशभर के अंदर कहीं पर भी इसी कारण थोड़ी सी भी ढील ना होने पाए।’’bharat ka itihas in hindi 

 

इसी के समकालीन एक दूसरा अंग्रेज रेवरेंड कैनेडी लिखता है

‘’ हम पर कुछ भी आपत्तियां क्यों ना आए जब तक भारत में हमारा साम्राज्य है तब तक हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा मुख्य कार्य उस देश में ईसाई मत को फैलाना है जब तक कन्याकुमारी से लेकर हिमालय तक सारा हिंदुस्तान ईशा के मत को ग्रहण ना कर लें और हिंदू तथा मुसलमान धर्मों की निंदा ना करने लगे तब तक हमें निरंतर प्रयत्न करते रहना चाहिए। इस कार्य के लिए हम जितने पर्यतन कर सके हमें करनी चाहिए और हमारे हाथ में जितने अधिकार और जितनी सत्ता है उसका इसी के लिए उपयोग करना चाहिए।  ‘’

 

यही विचार लार्ड मैकाले के लेखों में भी पाए जाते हैं। जिसने भारतीय शिक्षा प्रणाली यानी कि गुरुकुल प्रणाली का सबसे अधिक नाश किया वह देखिए क्या लिखता है। Isai Dharm

‘’ हमें भारत में इस प्रकार की एक श्रेणी पैदा कर देने का भरसक प्रयत्न करना चाहिए जो कि हमारे और उन करोड़ों भारतीयों के बीच जिन पर हम शासन करते हैं समझाने बुझाने का काम करें यह लोग ऐसे होने चाहिए जो कि रक्त और रंग की दृष्टि से हिंदुस्तानी हो किंतु जो अपनी रुचि भाषा भाव और विचारों की दृष्टि से अंग्रेज हो।  ‘’

अंग्रेजों ने अपने राज्य में ईसाइयत का कितना प्रचार किया और वह क्या करना चाहते थे यह ऊपर लिखित उदाहरणों से सर्वथा स्पष्ट हो जाता है। उनका अपना राज्य था भारतीयों की कोई सुनने वाला ना था अतः अंग्रेज अफसरों ने भारतीयों के साथ इच्छा अनुसार अन्याय और अत्याचार पूर्ण व्यवहार किया भारतीयों के धार्मिक भावों पर पद पद पर आघात किया ईसाई पादरियों ने अपनी वक्ताओं और पत्र-पत्रिकाओं में हिंदू तथा मुसलमान धर्म की घोर निंदा की। Isai Dharm

Isai Dharm Isai Dharm

सन 1849 में पंजाब पर कंपनी का अधिकार हो गया था इसके उपरांत कंपनी ने पंजाब को आदर्श ईसाई प्रांत बनाने के पर्यटन की एक सर हेनरी लॉरेंस, सर जॉन लारेंस आदि पंजाब के अंग्रेज शासक इसी विचार के थे इनमें से अनेकों का मत था कि पंजाब में शिक्षा का सब कार्य ईसाई पादरियों के हाथ में दे दिया जाए और सरकार की ओर से स्कूलों को पूरी सहायता दी जाए तथा अंग्रेज सरकार अपने स्कूल बंद करते स्कूल और कालेजों में इंजील और इसाई मत की शिक्षा दी जाया करें। अंग्रेज सरकार हिंदू धर्म और इस्लाम को किसी प्रकार की सहायता ना दे किसी भी प्रकार सरकारी विभाग में हिंदू मुसलमान कर्मचारी को त्योहार की छुट्टी ना दी जाए न्यायालयों में हिंदू मुसलमान धर्म शास्त्रों को और धार्मिक रीति-रिवाजों को कोई स्थान ना दिया जाए हिंदू मुसलमानों के धार्मिक कीर्तन बंद कर दिय जाए। Isai Dharm

अंग्रेजो के द्वारा भारतीयों को ईसाई बनाने की आकांक्षा

धीरे-धीरे इन अत्याचारी शासकों ने सैनिकों के धार्मिक भावुक की भी अवहेलना प्रारंभ कर दी बात बात में उनके धार्मिक नियमों का उल्लंघन किया जाने लगा कारतूस ओं में गाय और सुअर की चर्बी लगाना और फिर उनको मुंह से चुड़वाना इसका क्रियात्मक उदाहरण है कंपनी की सेना के अनेक अंग्रेज अधिकारी स्पष्ट रूप से सैनिकों के धर्म परिवर्तन के कार्य में लग गए। बंगाल की पदार्थ की सेना के एक अंग्रेज कमांडर ने अपनी सरकारी रिपोर्ट में लिखा है कि मैं निरंतर 28 वर्ष भारतीय सैनिकों को ईसाई बनाने की नीति पर आचरण करता रहा हूं और गैर ईसाइयों की आत्मा को शैतान से बचाना मेरे फौजी कर्तव्य का एक अंग रहा है।

 

सैनिकों को पद भर्ती में काफी लोभ दिया गया कि जो भी अपना धर्म छोड़ देगा उसको हवलदार बना दिया जाएगा और हवलदार को सूबेदार तथा सूबेदार को मेजर इत्यादि इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय सिपाहियों में बहुत असंतोष फैल गया भारत वासियों को ईसाई बनाने का पर्यतन सैनिकों को बलात धर्म परिवर्तन इत्यादि कामो से भारतीय जनता के मन असंतोष और प्रतिकार की भावनाओं से भर गए। अत्याचार के प्रतिशोध की भावना से ही 57 की महान क्रांति का जन्म हुआ

isai dharm ka mul desh

isai dharm ki sthapna kab hui

isai dharm ka itihas

isai religion history in hindi

isai dharm ke sansthapak

krischan dharm wikipedia

isai dharm ki shiksha

isai dharm ke sansthapak kaun hai

Krishna Janmashtami 2018 दुष्टो के मैसेज शेयर करना बंद करो इसे शेयर करो

Krishna Janmashtami

🙏🏻योगी राज श्री कृष्ण की जय🙏🏻)

दुष्टो द्वारा श्री कृष्ण जी को बदनाम करने के लिए घटिया मैसेज फैलाया जा रहा है उसके जवाब में हमने ये मैसेज बनाया है यदि आप हिन्दू हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करे

03-09-2018 तारीख़ को दुनिया के सबसे बड़े योगी राज का जन्मदिवस है

💥 इनके बाद ऐसा महान चरित्रवान महान योगी दुनिया में कोई दूसरा नहीं हुआ 💥

👉🏻महाभारत में जिनको सबसे आदरणीय बताया गया है।

👉🏻जरासंध जैसे दुष्ट को मारा अनेको राजाओ को उसकी कैद से छुड़वाया

👉🏻 छोटी उम्र में ही अपने बाहुबल से कंस को मारा कंस ने अपने माँ बाप को बंदी बनाया था …

👉🏻बंकिम चंद्र चटर्जी जिन्होंने वंदे मातरम लिखा था उन्होंने 36 वर्षों तक महाभारत पर अनुसंधान किया था उन्होंने कहा है कि महाभारत के अनुसार श्री कृष्ण जी की केवल एक ही पत्नी थी जो कि रुकमणी थी ……

👉🏻ऋषि दयानंद सत्यार्थ प्रकाश में लिखते हैं पूरे महाभारत में कृष्ण जी के चरित्र में कोई दोष नहीं मिलता उन्हें वह श्रेष्ठ पुरुष कहते हैं ऋषि दयानंद श्री कृष्ण जी को महान विद्वान कुशल राजनीतिज्ञ सदाचारी और सर्वथा निष्कलंक मानते हैं।

👉🏻 योगी राज की एक ही पत्नी थी सिर्फ रुक्मणि…..

👉🏻 श्री कृष्ण और रुक्मणि ने 12 वर्ष तक ब्रह्चारी पालन कर एक माहा प्रतापी पुत्र को जन्म दिया

👉🏻जो नारी जाती का सदैव सम्मान किया करते थे ….

👉🏻 पांडवों द्वारा जब राजसूय यज्ञ किया गया तो श्री कृष्ण जी महाराज को यज्ञ का सर्वप्रथम अर्घ प्रदान करने के लिए सबसे ज्यादा उपर्युक्त समझा गया ……..

👉🏻राजसूय यज्ञ किया गया तो श्री कृष्ण जी महाराज की श्रेष्ठता देखिये उन्होंने सभी आगंतुक अतिथियो के धुल भरे पैर धोने का कार्य भार लिया……http://www.amitaryavart.com

👉🏻 जिन्होंने कूटनीति से बिना हथियार उठाये न केवल दुष्ट कौरव सेना का नाश कर दिया बल्कि धर्म की राह पर चल रहे पांडवो को विजय भी दिलवाई। Amit Aryavart

💥💥🙏🏻 जन्माष्टमी– की –हार्दिक शुभकामनाएँ सबसे –पहले 🙏🏻💥💥

और अधिक जानने के लिए आप हमारी ये वीडियो देख सकते है

Krishna Janmashtami

जन्माष्टमी 2018 क्या श्री कृष्ण जी की 16000 रानियां थी?

Krishna – अक्सर आपने लोगों को यह कहते हुए सुना होगा विधर्मियों को यह कहते हुए सुना होगा कि श्री कृष्ण जी की 16000 रानियां थी यदि कोई व्यक्ति साधारण बुद्धि रखता है तो वह विचार कर सकता है क्या कोई व्यक्ति 16000 स्त्रियों से विवाह कर सकता है यह बात दुष्टों के द्वारा योगीराज श्री krishna जी का जो चरित्र है वह खराब करने के लिए यह बातें कही गई है। यह जितनी भी आप कहानियां सुनते है ना श्री krishna जी के बारे में यह सब की सब पुराणों से ली गई है। सत्य बात यह है कि इनका श्री कृष्ण जी के साथ में कोई भी लेना देना नहीं है।

krishna janmashtami images

जन्माष्टमी 2018 पर योगीराज श्री कृष्ण जी पर असली जानकारी। असली कृष्ण कौन से पुराणों वाले या महाभारत वाले

सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि हम महाभारत की बात पर क्यों यकीन करें और पुराणों की बातों पर क्यों यकीन ना करें देखें दोस्तों महाभारत योगीराज श्री कृष्ण जी के समय में घटित हुई थी और महाभारत वेदव्यास जी ने लिखी थी जोकि कृष्ण जी के समकालीन थे और उन से अधिक कृष्ण जी के बारे में बाद वाले भला क्या जान सकते थे तो उन्होंने कहीं पर भी krishna जी को गलत नहीं लिखा है बल्कि महाभारत में तो उनको सबसे आदरणीय बताया गया है।

देखिए महाभारत में लिखा है

पांडवों द्वारा जब राजसूय यज्ञ किया गया तो श्री कृष्ण जी महाराज को यज्ञ का सर्वप्रथम अर्घ प्रदान करने के लिए सबसे ज्यादा उपर्युक्त समझा गया जबकि वहां पर अनेक ऋषि मुनि , साधू महात्मा आदि उपस्थित थे। वहीँ श्री कृष्ण जी महाराज की श्रेष्ठता देखिये उन्होंने सभी आगंतुक अतिथियो के धुल भरे पैर धोने का कार्य भार लिया। श्री कृष्ण जी महाराज को सबसे बड़ा कूटनितिज्ञ भी इसीलिए कहा जाता है क्यूंकि उन्होंने बिना हथियार उठाये न केवल दुष्ट कौरव सेना का नाश कर दिया बल्कि धर्म की राह पर चल रहे पांडवो को विजय भी दिलवाई। अब आप बताइये क्या भला कोई लम्पट, व्यभिचारी , ये सब कार्य कर सकता है?

कृष्ण जी महाराज की 16000 रानियों वाली बात क्या है ?

दुष्ट लोग हमेशा कहते हैं कि कृष्ण जी तो 16000 रानियां रखते थे वह व्यभिचारी थे।

अब इसका विरोध करने वाले क्या कहते हैं यह भी जान लीजिए
इस बात का विरोध करने वाले कहते हैं कि उस समय कोई दुष्ट था जो असम का राजा था और उसने 16000 रानियों को यानी कि 16000 राज्यों की स्त्रियों को रानियों को अपनी कैद में रखा था उनसे सम्भोग आदि करने के लिए। सत्य बात तो यह भी नहीं है।

सच तो दोस्तों यह है कि जो 16000 रानियों वाली कल्पना है यह पूरी की पूरी झूठ है ऐसा कभी कुछ हुआ ही नहीं था आप कल्पना कीजिए 16000 रानी है यानी कि 16000 राज्य पूरे भारत को अफगानिस्तान को इराक को सबको भी आप  मिला देंगे तब भी 16000 राज्य नहीं बनेंगे कोई एक 1 किलोमीटर के राज्य नहीं होते थे बहुत अधिक क्षेत्रफल के राज्य होते थे और यदि मान भी लिया जाए कि 16000 राज्यों को हराकर उनकी रानियों को कैद किया गया था तो उसमें भाई पांडव और कौरव की उनके घर की महिलाओं को कैसे छोड़ दिया उसने यह मात्र कोरी कल्पना है और कुछ भी नहीं है। यह बात पूरी की पूरी झूठ और मिलावटी है जो कि किसी भी प्रकार तरक की कसौटी पर खरी नहीं उतरती।

krishna janmashtami images hd

1- बंकिम चंद्र चटर्जी जिन्होंने वंदे मातरम लिखा था उन्होंने 36 वर्षों तक महाभारत पर अनुसंधान किया था और श्री कृष्ण जी महाराज पर उत्तम ग्रंथ लिखे थे तो उन्होंने कहा है कि महाभारत के अनुसार श्री कृष्ण जी की केवल एक ही पत्नी थी जो कि रुकमणी थी और उनकी जो 16000 पत्नियां दो या तीन पत्नियां यह केवल कोरी कल्पना मात्र है और ऐसा सवाल ही पैदा नहीं होता कि उनकी 16000 पत्नियां थी।

2- हमारे देश में अभी एक ऋषि हुए थे जिनका नाम था ऋषि दयानंद वह अपनी सत्यार्थ प्रकाश में कृष्ण के बारे में क्या लिखते हैं चलिए जानते हैं। ऋषि दयानंद लिखते हैं पूरे महाभारत में कृष्ण जी के चरित्र में कोई दोष नहीं मिलता उन्हें वह श्रेष्ठ पुरुष कहते हैं ऋषि दयानंद श्री कृष्ण जी को महान विद्वान कुशल राजनीतिज्ञ सदाचारी और सर्वथा निष्कलंक मानते हैं।

यहां पर हमें एक बात जान लेनी चाहिए कि महाभारत में कृष्ण जी के बारे में कहीं पर भी कोई भी गलत बात नहीं लिखी गई है और ना ही किसी राधा का जिक्र आता है तो श्री krishna जी के साथ में रही हो तो कृष्ण को बदनाम किसने किया किसने झूठ लिखा उनके बारे में आइए हम आपको प्रमाण के साथ बताते हैं कृष्ण के बारे में झूठ किसने लिखा उन्हें कलंकित किया यह सब कार्य किया पाखंडियों के पुराणों ने उन पाखंडियों ने पुराणों को ऋषियों के नाम से लिखा था कि कोई उन पर शक ना कर सके।

ऐसे महान व्यक्तित्व पर चोर, लम्पट, रणछोर, व्यभिचारी, चरित्रहीन , कुब्जा से समागम करने वाला आदि कहना अन्याय नहीं तो और क्या है और इस सभी मिथ्या बातों का श्रेय पुराणों को जाता है।

चलिए अब कुछ पाखंडियो और पुराणों के विचार जानते है

इस्कॉन से तो आप सभी परिचित ही होंगे इस्कॉन के जो संस्थापक थे प्रभुपाद जी उनके अनुसार श्री कृष्ण को सही प्रकार से जानने के बाद आप वैलेंटाइन डे को जान पाएंगे यानी व्यभिचार करने वाला दिन को जान पाएंगे।

पुराणों में लिखा है श्रीकृष्ण के साथ गोपियों की रासलीला का झूठा मिथ्या वर्णन।

विष्णु पुराण अंश 5 अध्याय 13 श्लोक 59-60 में लिखा गया है
गोपियां अपने पति, पिता और भाइयों के रोकने पर भी नहीं रूकती थी रोज रात्री को भी व्यक्ति विषय भोग की इच्छा रखने वाली Krishna के साथ रमण भोग किया करती थी कृष्ण भी अपनी किशोर अवस्था सम्मान करते हुए रात्रि के समय उनके साथ रमण किया करते थे।

इससे आगे मैं किसी पुराण में लिखी हुई अश्लील बातें अपने इस लेख में नहीं लिखूंगा सिर्फ मैं आपको प्रमाण के लिए उन पुराणों के नाम ही बताऊंगा

योगीराज श्री कृष्ण जी को बदनाम इन पुराणों ने किया है।

विष्णु पुराण, भागवत पुराण, ब्रह्मा वैवर्त पुराण,

आप हमारी वीडियो भी देख सकते है

krishna janmashtami 2018 date,janmashtami 2018 date in india,krishna janmashtami 2019,janmashtami 2018 iskcon,janmashtami 2018 date in india calendar,janmashtami 2017,krishna jayanthi 2018,2018 janmashtami kab hai,krishna janmashtami images

 

Rishi Dayanand को एक वेश्या ने अपने जाल में फ़साना चाहा

Swami Dayanand प्रचार करते हुए मथुरा पहुंच गए वहां पर लोगों को वैदिक धर्म की शिक्षा देने लगे यह बात कुछ पण्डो को अच्छी नहीं लगी क्योंकि ऋषि दयानंद पाखंड का हमेशा विरोध किया करते थे और लोगों को वेदों के रास्ते पर चलने की शिक्षा दिया करते थे वह लोगों को सच्ची शिक्षा दिया करते थे जिस कारण से पाखंडी पंडो का धंधा मंदा पड़ गया था। Rishi Dayanand Swami Dayanand

Swami Dayanand Saraswati In Hindi

swami dayanand saraswati in hindi

पंडो ने एक चाल चाल चली उन्होंने सोचा क्यों ना ऋषि दयानंद को बदनाम कर दिया जाए तो उन्होंने एक वैश्या से संपर्क किया गुंडों ने वैश्या को बताया कि यहां पर एक दयानंद नाम का व्यक्ति आया हुआ है हमने उस को बदनाम करना है तुम कुछ ऐसा करो कि वह समाज की नजरों में बदनाम हो जाए तब उस वैश्या ने श्रृंगार किया और ऋषि दयानंद के पास पहुंच गई। Swami Dayanand

उस समय ऋषि दयानंद यमुना के तट पर संध्या कर रहे थे वह समाधि में थे तब वैश्या ऋषि दयानंद के सम्मुख आकर बैठ गई और जब ऋषि दयानंद की समाधि टूटी तो जैसे ऋषि दयानंद ने आंखें खोली तो वैसे ही उस महिला को देखते ही ऋषि दयानंद बोले माता तुम यहां क्यों आई। यह बात सुनकर वह वेश्या फूट-फूट कर रोने लगी और उसने सारी बात जो पंडों ने उससे कही थी किस प्रकार दयानंद को बदनाम करना है यह सब बातें उसने ऋषि दयानंद को बता दी और कहने लगी कि मैंने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई मुझे इतना सात्विक शब्द माता कहकर पुकारेगा।

तब वेश्या ने कहा कि आज से तो मेरा जीवन ही बदल गया और मैं आज से यह धंधा धंधा बंद कर दूंगी।

Swami Dayanand Saraswati Social Reformer

तो देखा आपने एक योगी के संपर्क में आने से एक वैश्या का जीवन किस प्रकार बदल गया ऐसे होते हैं सच्चे योगी आज के जैसे पाखंडियों की तरह नहीं। इस छोटी सत्य घटना को यहां पर लिखने का मेरा उद्देश्य सिर्फ इतना ही है कि अधिक से अधिक लोग यह विचार करने में सक्षम हो सके जान सकें की सच्चे योगी कैसे होते हैं।

Manusmriti In Hindi

आख़िर में मैं आपको यही कहूंगा कि यम नियमो का पालन करते हुए गायत्री मंत्र या ओ३म का उच्चारण जरूर करें जिससे कि आप मोक्ष की तरफ आगे बढ़ सके क्योंकि मनुष्य का अंतिम लक्ष्य भी यही है हम इसीलिए बार-बार जन्म और मृत्यु में फंसे रहते हैं क्योंकि हम मोक्ष नहीं प्राप्त कर पाते हैं मोक्ष प्राप्त करेंगे तो हम इन सब दुखों से मुक्ति पा जाएंगे।

दोस्तों यह लेख आपको अच्छा लगा तो इसे अधिक से अधिक सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें WhatsApp Facebook आदि पर जिससे कि अधिक से अधिक लोग इसका फायदा उठा सकें।

आप हमारी वीडियो भी देख सकते हो

rishi dayanand bhajan,rishi dayanand gatha mp3,rishi dayanand ki gatha,swami dayanand saraswati in hindi,swami dayanand saraswati in gujarati,

rishi dayanand ki gatha gaate hain,swami dayanand saraswati social reformer,dayananda saraswati books,

Manusmriti कहा से खरीदे Manusmriti In Hindi

Manusmriti मनुस्मृति के बारे में आपने दूसरों से सुना होगा कि मनुस्मृति में यह लिखा है मनुस्मृति में वह लिखा है Manusmriti में मांस खाना लिखा है Manusmriti में जात पात लिखी है ना जाने कैसी-कैसी बातें आपने विधर्मियों के मुंह से मनुस्मृति के बारे में सुनी होगी।

Manusmriti

जर्मनी के महान दार्शनिक फ्रेडरिक नीत्शे ने एक बात कही थी उन्होंने कहा था कि मनुसमृति बाइबल से भी श्रेष्ठ ग्रंथ है, बल्कि मनुस्मृति की तुलना बाइबल से तो की ही नहीं जा सकती यदि कोई मनुस्मृति की तुलना बाइबल से करता है तो यह महापाप है।

Manusmriti सभी हिन्दुओ जरूर खरीदे

लेकिन अधिकतर हिंदुओं ने Manusmriti को पढ़ने का प्रयास तक नहीं किया होगा हिंदू जानते ही नहीं कि उनकी Manusmriti में क्या लिखा है बस वह तो विधर्मियों की बातें सुनते रहते हैं और उन्हें सही जवाब भी नहीं दे पाते हैं। इसीलिए आज हम आपको बताएंगे कि आप मनुस्मृति कहां से खरीद सकते हैं और विधर्मियों को उचित उत्तर दे सकते हैं विधर्मियों की बोलती बंद कर सकते हैं।

मनुस्मृति के बारे में जर्मनी के महान दार्शनिक फ्रेडरिक नीत्शे ने एक बात कही थी उन्होंने कहा था कि मनुसमृति बाइबल से भी श्रेष्ठ ग्रंथ है, बल्कि मनुस्मृति की तुलना बाइबल से तो की ही नहीं जा सकती यदि कोई मनुस्मृति की तुलना बाइबल से करता है तो यह महापाप है। आप जर्मनी के इन महान दार्शनिक के विचारों से समझ ही गए होंगे कि मनुस्मृति कितना अधिक महत्व रखती है मात्र कुछ दुष्टों के मिलावट कर देने से मनुस्मृति का महत्व खत्म नहीं हो जाता।

महर्षि मनु ही संसार में ऐसे पहले व्यक्ति हुए हैं जिन्होंने संसार को एक व्यवस्थित नियमबद्ध नैतिक और आदर्श मानवीय जीवन शैली की पद्धति सिखायी है। महर्षि मनु को मानव का आदि पुरुष भी कहा जाता है महर्षि मनु द्वारा रचित मनुस्मृति इतिहास का सबसे पुरातन धर्मशास्त्र है।

Manusmriti रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने मनु को एक प्रामाणिक धर्मशास्त्रज्ञ के रूप में कहा है

करोड़ों सालों तक मनुसमृति हमारा संविधान रहा है Manusmriti के आधार पर ही सारे निर्णय होते थे दुष्टों का दंड दिया जाता था और किसी के साथ भी कोई भेदभाव नहीं होता था मनुस्मृति में आप पाएंगे कि ऋण क्या होता है ऋण को चुकाने की पद्धति क्या है आखिरकार ब्याज दिया कितना जाए यह सब कुछ आपको मनुसमृति में मिल जाएगा।

आज कुछ नवबोध भीम वादी मनुस्मृति के बारे में दुष्प्रचार करते हैं ना जाने कैसी-कैसी बातें Manusmriti के बारे में बोलते हैं जो कि मनुस्मृति में है ही नहीं या फिर उसमें मिलावट कर दी गई है जब आप मनुसमृति को पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा कि सर्वप्रथम महर्षि मनु ने क्या कहा और बाद में उस बात के विपरीत मिलावट कर दी गई उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि सत्य क्या है और असत्य क्या है

दोस्तों जो दुष्ट बुद्धि के होते हैं तामसिक बुद्धि के होते हैं जो निरी निम्न कोटि की बुद्धि के होते हैं वह कभी भी सत्य को जानने का प्रयास नहीं करते वह सिर्फ और सिर्फ असत्य को जानकर ही भ्रांतियां फैलाते रहते हैं कभी यह जानने का प्रयास ही नहीं करते कि पहले तो ऋषि ने कुछ और कहा था बाद में जो उसके बाद के विपरीत बाते लिखी गई है वह बात ऋषि की कही हुई नहीं है वह तो दुष्ट और विधर्मियों की लिखी गई है तो भला विधर्मियों की बातों को सत्य मानकर कितना हाय तौबा मचाते हैं।

रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने मनु को एक प्रामाणिक धर्मशास्त्रज्ञ के रूप में कहा है और हिंदुओं में भगवान के रूप में पूज्य श्री राम अपने आचरण को शास्त्र सम्मत सिद्ध करने के लिए उस के समर्थन में मनु के श्लोकों को उध्दृत करते हैं।

मनुस्मृति कहां से खरीदें

जो पता मैं आपको मनुसमृति खरीदने के लिए दूंगा वहां से आपको 2 तरीके की मनुस्मृति मिलेंगी एक मनुस्मृति विशुद्ध मनुस्मृति है जिसके अंदर कोई मिलावट नहीं है उसमें से मिलावट को निकाल दिया गया है। और एक सिर्फ c है जिसके अंदर आपको मिलावटी श्लोक भी मिलेंगे और सही श्लोक भी मिलेंगे उसमें से आपको निर्णय करना होगा कि कौन सही है और कौन गलत है मैं आपको सलाह दूंगा कि आप यह दोनों ही मनुस्मृति मंगवा लीजिए

विशुद्ध मनुस्मृति

Manusmriti

मनुस्मृति

Manusmriti

मनुस्मृति मंगवाने का पता  – 427 , मंदिर वाली गली, नया बांस, खारी बावली, दिल्ली -110006
दूरभाष- 011-43781191 , 9650522778

आप हमारी वीडियो भी देख सकते है

Keyword- manusmriti in hindi,original manusmriti in hindi pdf,manusmriti pdf in marathi,original manusmriti in hindi pdf